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SC: अनुच्छेद 20, 22 को अधिकारातीत घोषित करने के लिए दायर याचिका पर सवाल; कोर्ट ने दो वकीलों को पेश होने को कहा

Mon, 23 Oct 2023 05:49 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 20 और 22 को संविधान के भाग तीन से बाहर घोषित करने की अपील वाली याचिका दायर करने पर सवाल खड़ा किया है। याचिकाकर्ता वकील और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
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supreme court - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि अनुच्छेद 20 और 22 को संविधान का उल्लंघन करने वाला घोषित करने के लिए याचिका कैसे दायर की जा सकती है। इस बारे में बताने के लिए कोर्ट ने एक एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) सहित दो वकीलों को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने को कहा है।

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संविधान का अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण से संबंधित है। वहीं, अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण से जुड़ा है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 20 और 22 को अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) सहित कुछ अन्य अनुच्छेदों का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की गई है। 

सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के नियम क्या हैं?
संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए नियमों के अनुसार शीर्ष अदालत में किसी पक्ष की तरफ से ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ का दर्जा रखने वाले वकील ही दलील रख सकते हैं।
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तीन जजों की पीठ में क्या दलीलें दी गईं
याचिका न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। पीठ में जस्टिस सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि हमसे मुख्य वकील की अनुपलब्धता की वजह से सुनवाई टालने का अनुरोध किया गया है।

31 अक्तूबर को मामले की सुनवाई
पीठ ने 20 अक्तूबर को सुनाए गए अपने आदेश में कहा कि तथाकथित मुख्य वकील और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड यहां आएं और यह समझाने की कोशिश करें कि इस तरह की याचिका कैसे दायर की जा सकती है। शीर्ष कोर्ट ने मामले को 31 अक्तूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के नियम क्या हैं?
गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाए गए नियमों के अनुसार, केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के रूप में नामित वकील ही शीर्ष अदालत में किसी पक्ष की पैरवी कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है: केंद्र
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के मौजूदा कार्यकाल को 31 मार्च 2025 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। आयोग में रिक्त पदों को भरने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। शीर्ष कोर्ट ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के हलफनामे पर गौर किया कि आयोग का कार्यकाल बढ़ाने के अलावा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और एक अन्य सदस्य को 31 मार्च 2025 तक नियुक्त किया गया है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह कहकर वकील राधाकांत त्रिपाठी की जनहित याचिका का निपटारा कर दिया कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि केंद्र सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाएगी। पीठ ने अपने 20 अक्तूबर के आदेश में कहा कि जवाबी हलफनामे में केंद्र ने यह भी बताया है कि आयोग में उपयुक्त उम्मीदवारों के अभाव में सदस्यों के चार पद खाली पड़े हैं।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
जज ने अपमानजनक टिप्पणी हटवाने के लिए शीर्ष अदालत का किया रुख
गुवाहाटी हाईकोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश ने आतंकवाद से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की पीठ द्वारा उनके खिलाफ की गई कुछ अपमानजनक टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जज ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अदालत के न्यायाधीश के रूप में फैसला सुनाया था। जिसके खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान गुवाहाटी उच्च न्यायालय की पीठ ने कथित अपमानजनक टिप्पणी की। शीर्ष कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है। अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर को होगी।
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