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Supreme Court: अब छात्र 'किराये के घर पर GST' नहीं देंगे; राज्य बार काउंसिल की समितियों में 30% महिला कोटा

Fri, 05 Dec 2025 07:10 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि किसी आवासीय परिसर को ऐसे संस्थान को लीज पर देने पर, जो उसे छात्रों या कामकाजी पेशेवरों के लिए हॉस्टल के रूप में उपयोग करता है तो उस पर जीएसटी नहीं लगेगा। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में संपत्ति का मूल उपयोग आवासीय ही रहता है और इस पर कर लगाने से आवासीय उपयोग पर दी गई छूट का उद्देश्य विफल हो जाएगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि हॉस्टल भी रहने की सुविधा प्रदान करता है, इसलिए इसे आवासीय उपयोग की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यदि इस प्रकार की लीज पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया, तो इसका सीधा असर छात्रों और युवा पेशेवरों पर पड़ेगा, जबकि कानून की मंशा ही उनकी लागत को कम करना है। यह मामला बंगलूरू स्थित 42 कमरों वाली एक आवासीय संपत्ति से जुड़ा है, जिसे सह-मालिकों ने डी ट्वेल्व स्पेसेस प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया था। कंपनी इस संपत्ति को तीन से बारह महीने तक रहने वाले छात्रों और कामकाजी किरायेदारों के लिए हॉस्टल के तौर पर चला रही थी। संपत्ति के मालिक ने यह जानने के लिए अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर), कर्नाटक से आवेदन किया था कि क्या इस प्रकार की किराये पर देने की सेवा जीएसटी छूट के दायरे में आएगी।

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बीसीआई राज्य बार काउंसिल की कार्यकारी समितियों में महिला वकीलों को 30 फीसदी कोटा सुनिश्चित करे
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से आगामी राज्य बार काउंसिल चुनावों में महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने को कहा। राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के अनिवार्य प्रतिनिधित्व की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत को शीर्ष बार निकाय बीसीआई ने बताया कि इस तरह के आरक्षण को लागू करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता होगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ को बीसीआई के वकील गुरुकुमार ने बताया कि कई राज्य बार काउंसिल चुनाव प्रक्रियाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जिससे तत्काल बदलाव मुश्किल हो रहे हैं। इस पर सीजेआई ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि बीसीआई नियमों की व्याख्या इस तरह से करेगा कि यह राज्य बार काउंसिलों में 30 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करेगा। पदाधिकारियों के कुछ पदों के लिए भी ऐसी स्थिति उपलब्ध होनी चाहिए। बीसीआई के वकील ने कहा कि क्या सच में पर्याप्त संख्या में महिला वकील चुनाव लड़ेंगी, तो पीठ ने महिला वकीलों के बीच एक सर्वेक्षण के आधार पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से कार्यशाला का उल्लेख किया। आप कल की कार्यशाला में नहीं थीं। 83 प्रतिशत महिलाएं एससीबीए की सदस्य बनना चाहती हैं।

अरुंधति रॉय की पुस्तक की बिक्री पर रोक वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अरुंधति रॉय की पुस्तक मदर मैरी कम्स टू मी की बिक्री, वितरण और प्रदर्शन पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका में कहा गया था कि पुस्तक के आवरण पर उन्हें सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए। याचिकाकर्ता राजसिम्हन ने इसे कानून का उल्लंघन माना है, केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इसे खारिज कर दिया। सीजेआई ने कहा, वह एक प्रसिद्ध लेखिका हैं। उन्होंने ऐसी किसी चीज को बढ़ावा नहीं दिया है। पुस्तक में एक चेतावनी भी दी गई है और वह स्वयं एक प्रख्यात व्यक्ति हैं। फिर प्रचार के लिए ऐसा क्यों किया जा सकता है?

सीएम-गवर्नर सहमति बनाएं वरना हम करेंगे वीसी नियुक्त
सुप्रीम कोर्ट ने कहा केरल सरकार और गवर्नर दो राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को लेकर आम सहमति बनाएं।  अगर वे ऐसा नहीं कर पाते तो अदातल फैसला करेगी और वीसी नियुक्त कर देगी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस पीबी वराले की पीठ एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के कुलपतियों की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। जैसे ही मामला शुरू हुआ, जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि मामले की सुनवाई सोमवार को होगी। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, उम्मीद है कि कुछ प्रगति होगी। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि जस्टिस सुधांशु धूलिया कमेटी ने दो नामों की सिफारिश की थी और राज्यपाल ने दो नाम चुने। एजी ने कहा, मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री को इन नामों से कुछ दिक्कत है। गुप्ता ने जवाब दिया, जिस नाम को मुख्यमंत्री ने मंजूर नहीं किया, वही राज्यपाल को मंजूर है। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि जस्टिस धूलिया कमेटी ने हर विश्वविद्यालय के लिए चार नामों की सिफारिश की थी। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, मंगलवार तक, अगर आप सब इसे सुलझा लेते हैं तो ठीक है। नहीं तो हम नियुक्ति कर देंगे। इस मामले में अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी।
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न्यायपालिका में एआई के इस्तेमाल से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग के अनियमित इस्तेमाल को रोकने से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह न्यायपालिका में एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के दुष्प्रभावों से अवगत है, लेकिन इन मुद्दों का समाधान न्यायिक निर्देशों के बजाय प्रशासनिक स्तर पर अधिक उपयुक्त रूप से किया जा सकता है। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ वकील अनुपम लाल दास की दलील सुनी, जो याचिकाकर्ता कार्तिकेय रावल की ओर से पेश हुए थे। याचिका में एआई से बने कंटेंट से उत्पन्न जोखिम और उसके दुरुपयोग से न्यायिक प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभावों के खिलाफ सुरक्षात्मक कदम उठाने का अनुरोध किया गया। सीजेआई ने कहा, वरिष्ठ वकील कह रहे हैं कि एआई ऐसे न्यायिक संदर्भ या फैसले तैयार कर सकता है, जो अस्तित्व में ही नहीं होते और बाद में वे न्यायिक निर्णयों का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। सीजेआई ने कहा कि यह वकीलों और जजों का दायित्व है कि वे एआई से बने संदर्भों और निर्णयों की सत्यता की जांच करें। 
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