मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि उन्होंने राज्य में टू फिंगर टेस्ट को प्रतिबंधित कर रखा है। यौन शोषण की शिकार हुई महिला का यह टेस्ट किया जाता है, जिसमें यह पता लगाया जाता है कि पीड़िता सेक्सुअली एक्टिव है या नहीं। मेघालय सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल अमित कुमार सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। अमित कुमार ने कोर्ट में बताया कि राज्य सरकार ने 27 जून 2024 को ही टू फिंग टेस्ट पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस संबंध में राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नोटिफिकेशन भी जारी किया था।
पोक्सो एक्ट के तहत दोषी व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने मेघालय में दुष्कर्म पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट करने पर नाराजगी जाहिर की थी। पोक्सो एक्ट के दोषी ने दावा किया था कि पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट किया गया था। अब मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर कहा है कि टू फिंगर टेस्ट पर राज्य में प्रतिबंध है और इस संबंध में आदेश भी जारी किया जा चुका है।
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि टू फिंगर टेस्ट पीड़िता की शुचिता का उल्लंघन करता है। साथ ही यह बेहद पुराना, अवैज्ञानिक है। दरअसल मेघालय हाईकोर्ट के फैसले पर यौन शोषण के एक दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से जवाब मांगा था। इसी जवाब में मेघालय सरकार ने टू फिंगर टेस्ट पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।