सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डीडीए के अधिकारियों ने दिल्ली के दक्षिणी रिज में सड़कों को चौड़ा करने के लिए अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमाननापूर्ण कार्रवाई माना और पेड़ों की अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार डीडीए अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के लिए कुछ विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और दिल्ली में हरित कवर को बढ़ाने के लिए डीडीए और दिल्ली सरकार को सुझाव देगी।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निर्देश दिया कि अब से वनरोपण, सड़क निर्माण, पेड़ों की कटाई या संभावित पारिस्थितिक प्रभाव वाली किसी भी गतिविधि से संबंधित प्रत्येक अधिसूचना या आदेश में इस न्यायालय के समक्ष संबंधित कार्यवाही के लंबित होने का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए।
जस्टिस टी विनोद कुमार को मद्रास हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस टी विनोद कुमार को तेलंगाना उच्च न्यायालय से मद्रास उच्च न्यायालय भेजने की सिफारिश की है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 26 मई की बैठक में यह सिफारिश की। 17 नवंबर 1964 को जन्में जस्टिस विनोद कुमार ने नलगोंडा जिले के सूर्यापेट से शुरुआती पढ़ाई की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए हैदराबाद चले गए। उन्होंने ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से स्नातक और एलएलबी की पढ़ाई की। साल 1988 में जस्टिस कुमार आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में वकील के तौर पर पंजीकृत हुए। साल 2015 में वे आयकर विभाग के स्टैंडिंग काउंसल नियुक्त हुए और साल 2016 में वाणिज्यिक कर के लिए विशेष स्टैंडिंग काउंसल। 26 अगस्त 2019 को उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय में बतौर जज नियुक्त किया गया।
जस्टिस विनोद कुमार के अलावा कॉलेजियम ने राजस्थान, त्रिपुरा, झारखंड और मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों के ट्रांसफर की भी सिफारिश की। इनमें जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को राजस्थान से मद्रास उच्च न्यायालय, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को त्रिपुरा से तेलंगाना उच्च न्यायालय, जस्टिस एमएस रामचंद्र राव को झारखंड से त्रिपुरा उच्च न्यायालय, जस्टिस केआर श्रीराम को त्रिपुरा से तेलंगाना उच्च न्यायालय भेजा गया है।
वरिष्ठ वकील गर्मी की छुट्टियों में मामलों पर न करें बहस- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वरिष्ठ वकीलों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान मामलों पर बहस नहीं करनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जूनियर वकीलों को छुट्टियों के दौरान मौका मिलना चाहिए। जस्टिस बीवी नागरत्ना व जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी व नीरज किशन कौल से कहा, वरिष्ठ वकीलों को इन आंशिक कार्य दिवसों के दौरान मामलों पर बहस नहीं करनी चाहिए। ये वकील राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के एक आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर पेश हुए थे। इस संबंध में एक वकील ने मामले का उल्लेख करते हुए स्थगन का आग्रह किया, क्योंकि वरिष्ठ वकील श्याम दीवान उपलब्ध नहीं थे।
शीर्ष अदालत ने अपनी पारंपरिक गर्मी की छुट्टियों के दौरान अवकाशकालीन पीठ को आंशिक अदालती कार्य दिवस के रूप में नया नाम दिया है। यह घटनाक्रम उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 में संशोधन का हिस्सा था, जो अब उच्चतम न्यायालय (द्वितीय संशोधन) नियम, 2024 बन गया है। अधिसूचना के अनुसार, अदालत के आंशिक कार्य दिवसों की अवधि और न्यायालय व न्यायालय के कार्यालयों के लिए अवकाश की संख्या इस तरह से होगी कि यह रविवार को छोड़कर छुट्टियों की संख्या 95 दिनों से अधिक नहीं हो। इसे प्रधान न्यायाधीश निर्धारित करेंगे और आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा।