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SC Updates: सीजेआई ने केस वापसी के लिए अग्रिम पत्र भेजने की वकालत की, बोले- इससे अदालत की दक्षता बढ़ेगी

Wed, 27 Nov 2024 01:19 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बुधवार को सीजेआई ने वकीलों को पारिवारिक विवाद मामले में स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते समय मौखिक प्रस्तुतियां देने के बजाय केस वापसी के लिए अग्रिम पत्र दाखिल करने का सुझाव दिया। 
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने बुधवार को अदालती कामकाज को बेहतर करने के लिए पूर्व-संचार के महत्व पर जोर दिया। सीजेआई ने सुझाव दिया कि वकील सुनवाई के दौरान मौखिक प्रस्तुति देने के बजाय केस वापसी के लिए अग्रिम पत्र प्रस्तुत करें। सीजेआई ने 12 नवंबर को कहा था कि मामलों की तत्काल लिस्टिंग और सुनवाई के लिए मौखिक प्रस्तुतियों की अनुमति नहीं दी जाएगी और वकीलों से इसके लिए ईमेल या लिखित पत्र भेजने का आग्रह किया।
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बुधवार को सीजेआई ने वकीलों को पारिवारिक विवाद मामले में स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते समय मौखिक प्रस्तुतियां देने के बजाय केस वापसी के लिए अग्रिम पत्र दाखिल करने का सुझाव दिया। दरअसल एक मामले की सुनवाई के दौरान वकील ने पीठ को सूचित किया कि  दोनों पक्षों ने अपने मतभेदों को सुलझा लिया है और स्थानांतरण याचिका वापस लेना चाहते हैं।

वापसी को मंजूरी देते हुए सीजेआई ने टिप्पणी की कि अग्रिम सूचना से अदालत की दक्षता बढ़ेगी। सीजेआई ने कहा, 'यदि आपके पास ऐसा कोई अनुरोध है, तो आप हमेशा कोर्ट मास्टर को एक दिन पहले या दो दिन पहले एक पत्र दे सकते हैं। इससे हमें मामले को सुलझाने में मदद मिलेगी या फाइलें नहीं पढ़नी पड़ेंगी। 
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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को आदेश दिया है कि वह 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में गवाहों को धमकाने के आरोप पर जवाब दे। इस हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- धनशोधन के मामलों में दोषसिद्धी की दर इतनी कम क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से पूछा है कि धनशोधन के मामलों में दोषसिद्धी की दर इतनी कम क्यों है। इसके साथ ही कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी से जुड़े मामले पर भी सवाल उठाए, जिनकी गिरफ्तारी राज्य में शिक्षा विभाग में नियुक्तियों में कथित धांधली को लेकर की गई थी। कोर्ट ने पूछा कि पार्थ चटर्जी को कब तक जेल में रखा जा सकता है। 
 

सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं, इन्सानों के लिए भी थोड़ा सोचना होगा : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्र में निजी बसों के चलने के मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं बल्कि इन्सानों के बारे में भी थोड़ा सोचना होगा।

अदालत जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्र में निजी बसों के परिचालन की अनुमति देने के खिलाफ वकील गौरव कुमार अंसल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को बताया गया कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी रिपोर्ट में पाखरों-मोरघट्टी-कालागढ़-रामनगर वन मार्ग पर निजी बसों के परिचालन के खिलाफ सिफारिश की है। इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि इस मसले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। वहां के लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होंने सीईसी से कहा कि आप सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं सोच सकते।

उत्तराखंड सरकार के वकील ने कहा कि 18 सीटों वाली बस 1986 से वहां चल रही है। यह स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए है। न्यायमित्र वरिष्ठ वकील के परमेश्वर ने पीठ से कहा कि सड़क पर कोई आपत्ति नहीं है और सिर्फ वाणिज्यिक बस सेवा का विरोध किया जा रहा है।
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पदोन्नति सिर्फ कार्यभार ग्रहण करने पर ही प्रभावी
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति सिर्फ कार्यभार ग्रहण करने पर ही प्रभावी होती है, न कि पद रिक्त होने या सिफारिश की तिथि से। शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फरवरी 2023 के फैसले को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य की अपील पर यह टिप्पणी की और हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा व जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यह                एक सुस्थापित सिद्धांत है कि पदोन्नति पद रिक्त होने या पद सृजित होने की तिथि से नहीं बल्कि पद ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होती है। हालांकि अदालतों ने पदोन्नति के लिए विचार किए जाने के अधिकार को न सिर्फ वैधानिक अधिकार बल्कि मौलिक अधिकार के रूप में भी मान्यता दी है, लेकिन पदोन्नति अपने आप में कोई मौलिक अधिकार नहीं है। ब्यूरो
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