सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं, इन्सानों के लिए भी थोड़ा सोचना होगा : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्र में निजी बसों के चलने के मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं बल्कि इन्सानों के बारे में भी थोड़ा सोचना होगा।
अदालत जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्र में निजी बसों के परिचालन की अनुमति देने के खिलाफ वकील गौरव कुमार अंसल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को बताया गया कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी रिपोर्ट में पाखरों-मोरघट्टी-कालागढ़-रामनगर वन मार्ग पर निजी बसों के परिचालन के खिलाफ सिफारिश की है। इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि इस मसले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। वहां के लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होंने सीईसी से कहा कि आप सिर्फ जानवरों के बारे में नहीं सोच सकते।
उत्तराखंड सरकार के वकील ने कहा कि 18 सीटों वाली बस 1986 से वहां चल रही है। यह स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए है। न्यायमित्र वरिष्ठ वकील के परमेश्वर ने पीठ से कहा कि सड़क पर कोई आपत्ति नहीं है और सिर्फ वाणिज्यिक बस सेवा का विरोध किया जा रहा है।