सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में लंगर के दौरान सीजेआई संजीव खन्ना और अन्य न्यायाधीश (वीडियो ग्रैब)
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सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित अन्य न्यायाधीशों ने आज सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में वकीलों की तरफ से आयोजित लंगर में भाग लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली कंपनियों को सार्वजनिक कार्यों के ठेके देने की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग को लेकर सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह तक टाल दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ से दो याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य में सभी सरकारी ठेके करीबी परिवार के सदस्यों को दिए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने प्रतिवादियों राज्य सरकार और केंद्र की ओर से दायर जवाब को नहीं देखा है। इस पर दो फरवरी 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। इस पर भूषण ने कहा कि मामले में जल्द सुनवाई करें। क्योंकि राज्य को एक लिमिटेड कंपनी की तरह चलाया जा रहा है। पीठ ने कहा कि हम देखेंगे कि इस पर कब बहस होगी। मामले में पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिनचिन ड्रेमा और उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को पक्षकार बनाया गया है। दोरजी खांडू की 2011 में मुख्यमंत्री रहते हुए एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। याचिका में दावा किया गया कि हितों का स्पष्ट टकराव होने के बावजूद रिनचिन ड्रेमा की कंपनी ब्रांड ईगल्स को बड़ी संख्या में सरकारी ठेके दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन ने गुरुवार को शीर्ष अदालत के 2021 के फैसले के खिलाफ अवमानना का आरोप लगाने वाली क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसमें दिल्ली मेट्रो के साथ विवाद में अनिल अंबानी समूह की एक फर्म को 8,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने साल 2021 के फैसले के खिलाफ डीएमआरसी की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी थी। पीठ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का पूर्व का फैसला न्यायपूर्ण नहीं था। साल 2017 में ट्रिब्यूनल ने डीएमआरसी को 7200 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश दिया था, जो ब्याज की रकम लगाकर यह राशि कुल 8 हजार करोड़ रुपये थी। गुरुवार को शीर्ष अदालत के अप्रैल के फैसले की अवमानना का आरोप लगाने वाली एक याचिका न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने शुरू में कहा कि मैं इस पर सुनवाई नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसके सदस्य न्यायमूर्ति विश्वनाथन नहीं हैं।