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SC Updates: दिल्ली में प्रदूषण पर 'सुप्रीम' सुनवाई 18 नवंबर को, याचिकाकर्ता ने कहा- लोग गंभीर स्थिति में

Thu, 14 Nov 2024 05:34 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने के कारण राजधानी में धुंध की चादर छाई हुई है। सीरीफोर्ट इलाके में एक्यूआई 438 दर्ज किया गया है, जिसे सीपीसीबी के मुताबिक 'गंभीर' श्रेणी में रखा गया है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 18 नवंबर को सुनवाई होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र अपराजिता सिंह की ओर से दायर याचिका पर गौर करते हुए न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने पीठ से कहा कि कल से लोग गंभीर स्थिति में हैं। इससे बचने के लिए अदालत ने सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को एहतियाती कदम उठाने को कहा है। उन्होंने कुछ नहीं किया। उन्होंने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को इस बारे में सूचित कर दिया है और उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

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दिल्ली समेत एनसीआर में एक्यूआई खतरनाक स्तर पर
प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने के कारण राजधानी में धुंध की चादर छाई हुई है। सीरीफोर्ट इलाके में एक्यूआई 438 दर्ज किया गया है, जिसे सीपीसीबी के मुताबिक 'गंभीर' श्रेणी में रखा गया है। आनंद विहार में एक्यूआई 472 दर्ज हुआ है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जिस तरह से उत्तर भारत में पराली जलाने के मामले दिख रहे हैं, उसके हिसाब से फिलवक्त इसमें बड़े पैमाने पर कमी आने का अंदेशा नहीं है। राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई है, जिससे अक्षरधाम मंदिर और आस-पास के इलाकों में धुंध की मोटी परत छा गई है। 

11 नवंबर को दिल्ली पुलिस को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध के उसके आदेश को गंभीरता से न लेने पर 11 नवंबर को दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा माना जाता है कि कोई भी धर्म किसी भी ऐसी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देता, जो प्रदूषण को बढ़ाती है या लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाती है।' जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि अगर पटाखे इसी तरह से फोड़े जाते रहे तो इससे नागरिकों का सेहत का मौलिक अधिकार प्रभावित होगा।

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सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में लंगर, चीफ जस्टिस संजीव खन्ना समेत कई जज हुए शामिल

सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में लंगर के दौरान सीजेआई संजीव खन्ना और अन्य न्यायाधीश (वीडियो ग्रैब) - फोटो : एएनआई
सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित अन्य न्यायाधीशों ने आज सुप्रीम कोर्ट कैंटीन में वकीलों की तरफ से आयोजित लंगर में भाग लिया।
 

अरुणाचल के मुख्यमंत्री के परिवार को ठेका दिए जाने की जांच वाली याचिका पर सुनवाई टली

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली कंपनियों को सार्वजनिक कार्यों के ठेके देने की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग को लेकर सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह तक टाल दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ से दो याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य में सभी सरकारी ठेके करीबी परिवार के सदस्यों को दिए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने प्रतिवादियों राज्य सरकार और केंद्र की ओर से दायर जवाब को नहीं देखा है। इस पर दो फरवरी 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। इस पर भूषण ने कहा कि मामले में जल्द सुनवाई करें। क्योंकि राज्य को एक लिमिटेड कंपनी की तरह चलाया जा रहा है। पीठ ने कहा कि हम देखेंगे कि इस पर कब बहस होगी। मामले में पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिनचिन ड्रेमा और उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को पक्षकार बनाया गया है। दोरजी खांडू की 2011 में मुख्यमंत्री रहते हुए एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। याचिका में दावा किया गया कि हितों का स्पष्ट टकराव होने के बावजूद रिनचिन ड्रेमा की कंपनी ब्रांड ईगल्स को बड़ी संख्या में सरकारी ठेके दिए गए हैं।

DMRC-DAMEPL मामले की सुनवाई से जस्टिस विश्वनाथन ने खुद को अलग किया

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन ने गुरुवार को शीर्ष अदालत के 2021 के फैसले के खिलाफ अवमानना का आरोप लगाने वाली क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसमें दिल्ली मेट्रो के साथ विवाद में अनिल अंबानी समूह की एक फर्म को 8,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने साल 2021 के फैसले के खिलाफ डीएमआरसी की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी थी। पीठ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का पूर्व का फैसला न्यायपूर्ण नहीं था। साल 2017 में ट्रिब्यूनल ने डीएमआरसी को 7200 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश दिया था, जो ब्याज की रकम लगाकर यह राशि कुल 8 हजार करोड़ रुपये थी। गुरुवार को शीर्ष अदालत के अप्रैल के फैसले की अवमानना का आरोप लगाने वाली एक याचिका न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने शुरू में कहा कि मैं इस पर सुनवाई नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसके सदस्य न्यायमूर्ति विश्वनाथन नहीं हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने असम चाय निगम के अध्यक्ष से अपनी संपत्तियों की सूची देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को असम चाय निगम लिमिटेड के अध्यक्ष से अपनी चल और अचल संपत्तियों का ब्योरा देने को कहा। इससे पहले राज्य सरकार ने कहा था कि उसके पास घाटे में चल रहे इस निगम में और अधिक धन लगाने की क्षमता नहीं है। यह निगम 14 चाय बागान चलाता है।

जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने असम के मुख्य सचिव रवि कोटा की दलील पर गौर किया कि राज्य ने नकदी संकट से जूझ रहे असम चाय निगम लिमिटेड (एटीसीएल) को उबारने की पूरी कोशिश की है, लेकिन वह इसे इस स्थिति से बाहर नहीं निकाल पाया है। कोर्ट के समक्ष वर्चुअली पेश हुए रवि कोटा ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने एटीसीएल की स्थिति पर चर्चा की है और फैसला किया है कि घाटे में चल रहे इस उद्यम में और अधिक धन लगाना समझदारी नहीं होगी।

पीठ ने कहा कि यदि राज्य सरकार निगम में और अधिक धन लगाने को तैयार नहीं है, तो वह अपने कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए अपने 14 चाय बागानों को बेचने का निर्देश देगी, जिसमें भविष्य निधि भी शामिल है। शीर्ष अदालत राज्य के स्वामित्व वाले उद्यम एटीसीएल के इन चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को बकाया भुगतान न करने के लिए अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अवमानना याचिका अंतर्राष्ट्रीय खाद्य एवं कृषि श्रमिकों द्वारा बकाया भुगतान और पेंशन लाभ के लिए 2006 में दायर याचिका पर दायर की गई है।
 
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