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SC: भाजपा नेता के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी; TMC कार्यकर्ताओं से हाथापाई का मामला

Wed, 04 Dec 2024 12:43 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता कबीर शंकर बोस के खिलाफ 2020 में उनके सुरक्षाकर्मियों और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई के संबंध में दर्ज दो प्राथमिकियों को बुधवार को सीबीआई को सौंप दिया।

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न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ बोस की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मामले की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस से सीबीआई, एसआईटी या किसी स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

पीठ ने कहा, 'इस मामले के अजीबोगरीब तथ्यों को देखते हुए प्रतिवादियों को आदेश दिया जाता है कि वे दोनों प्राथमिकियों के आधार पर जांच के कागजात तथा जांच पूरी करने के लिए सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौंप दें, ताकि यदि आवश्यक हो तो मुकदमा शुरू किया जा सके और पक्षों को न्याय मिल सके।'
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बोस ने अपनी याचिका में दावा किया था कि 6 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के सेरामपुर में रात करीब 8 बजे उनके आवास के बाहर संतोष कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह के नेतृत्व में उनके और उनके सीआईएसएफ गार्डों पर भारी हमला हुआ और नारेबाजी की गई।प्रोटोकॉल के तहत, सीआईएसएफ ने याचिकाकर्ता को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जो हुआ, वह सीआईएसएफ की ओर से अपने सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति की जान बचाने के लिए किया गया प्रोटोकॉल था और याचिकाकर्ता मौके पर मौजूद भी नहीं था।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा, 'देर रात दो बजे तक पूरी इमारत पर तृणमूल कांग्रेस के 200 से अधिक ने घेराबंदी कर रखी थी, जिसका नेतृत्व क्षेत्र के मौजूदा सांसद कल्याण बनर्जी कर रहे थे।'

सूरजगढ़ खदान आगजनी मामले में वकील गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई टली

उच्चतम न्यायालय ने 2016 के सूरजगढ़ लौह अयस्क खदान आगजनी मामले के सिलसिले में अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई 18 दिसंबर तक के लिए टाल दी।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार के वकील ने इस आधार पर सुनवाई स्थगित करने की मांग की थी कि कुछ स्थानीय दस्तावेजों का अनुवाद किए जाने की आवश्यकता है।
 
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि वकील करीब छह साल से जेल में हैं और इस मामले में सुनवाई की जरूरत है। पीठ ने राज्य सरकार को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।
 
इससे पहले शीर्ष न्यायालय ने 10 अक्तूबर 2023 को राज्य सरकार को नोटिस जारी कर याचिका पर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था। बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने 31 जनवरी 2023 को यह उल्लेख करते हुए गाडलिंग को जमानत देने से इनकार कर दिया था कि उनके खिलाफ आरोप प्रथमदृष्टया सही प्रतीत होते हैं।

माओवादियों ने 25 दिसंबर 2016 को उन 76 वाहनों को कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया था, जिनका उपयोग महाराष्ट्र में गडचिरौली स्थित सूरजगढ़ खदानों से लौह अयस्क की ढुलाई के लिए किया जा रहा था।

गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों को मदद प्रदान की। उनके खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के विभिन्न प्रावधानों और भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि गाडलिंग ने सरकार की गतिविधियों के बारे में गोपनीय सूचना और कुछ खास नक्शे भूमिगत माओवादियों को मुहैया कराये थे।

गाडलिंग एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में भी आरोपी हैं। यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुई एल्गार परिषद में दिये गये कथित भड़काऊ भाषणों से संबद्ध है। पुलिस का दावा है कि इन भाषणों के चलते इसके अगले दिन पुणे जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के नजदीक हिंसा भड़की थी।

अवैध रेत खनन गंभीर मुद्दा, प्रभावी तरीके से निपटा जाए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अवैध रेत खनन को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इस पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। शीर्ष कोर्ट ने तमिलनाडु, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों से इस मुद्दे पर तथ्य और आंकड़े पेश करने को कहा है। यह मामला 2018 में दायर की गई एक जनहित याचिका (पीआईएल) से जुड़ा है। याचिका एम. अलागरसामी ने दायर की थी। याचिका में पांच राज्यों तमिलनाडु, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में नदी और समुद्र तटों से अवैध रेत खनन की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई थी। 

याचिका में आरोप लगाया गया था कि अवैध और अनियंत्रित रेत खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और संबंधित अधिकारियों ने बिना पर्यावरणीय योजना और मंजूरी के खनन कार्य की अनुमति दी है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने यह जानने की कोशिश की कि क्या राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर कोई इसी तरह की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चीफ जस्टिस खन्ना ने कहा, अवैध रेत खनन एक गंभीर मुद्दा है और इससे प्रभावी तरीके से निपटा जाना चाहिए। सीजेआई ने यह टिप्पणी उस समय की जब वकील प्रशांत भूषण ने याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि राज्य सरकारें इस मुद्दे को छिपाने में लगी हुई हैं, बजाय इसके कि वे सख्त कार्रवाई करें। 

पहली नजर में आप एक भ्रष्ट व्यक्ति हैं: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी से कहा, आप प्रथम दृष्टया एक भ्रष्ट व्यक्ति हैं। आपके घर से करोड़ों रुपये बरामद थे। शीर्ष कोर्ट ने यह टिप्पणी चटर्जी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। पार्थ चटर्जी राज्य में कथित नौकरी के बदले नकदी घोटाले मामले में पकड़े गए थे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भइयां की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से यह सवाल किया कि चटर्जी को अनिश्चितकाली तक क्यों जेल में रखा जा रहा है। उन्हें बिना किसी समय सीमा के जेल में रखना ठीक नहीं है। 

पीठ ने कहा, आप (पार्थ चटर्जी) पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और आपके घर से करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं। आप समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि भ्रष्ट व्यक्ति को इस तरह जमानत मिल जाए? चटर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल के अलावा सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जिसमें एक हफ्ते पहले ही एक आरोपी को जमानत दी गई। इस पर पीठ ने कहा, सभी मंत्री नहीं थे, मुकुल रोहतगी जी। आप उच्च पद पर थे, इसलिए आप दूसरों के साथ बराबरी की मांग नहीं कर सकते। आप जांच में देरी और अभियोजन पक्ष की भूमिका पर सवाल उठा सकते हैं। लेकिन मामले की मेरिट पर नहीं। 

पाकिस्तान: सुरक्षा बलों के हमलों में सात आतंकवादी मारे गए

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अलग-अलग अभियानों में बुधवार को सुरक्षा बलों ने सात आतंकवादियों को मार गिराया। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा जिले में सीमा बिंदु पर किए गए अभियान में क्वॉडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल किया, जिसमें दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। ये आतंकवादी कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकवादी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े हुए थे। एक अन्य ड्रोन हमले में सुरक्षा बलों ने बन्नू जिले के जानी खेल में आतंकवादियों  को निशाना बनाया और पांच आतंकवादी मारे गए। 

मानहानि मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राजनीति में बेवजह की तारीफों और आलोचनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के मानहानि के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि राजनीति में आपको बेवजह की तारीफों और आलोचनाओं के लिए तैयार रहना चाहिए। यह मामला मुरासोली ट्रस्ट की ओर से दायर किया गया था। आरोप लगाया गया था कि दिसंबर 2020 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले अपमानजनक बयान दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2023 में मुरुगन के खिलाफ जारी मानहानि कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और मुरासोली ट्रस्ट जवाब मांगा था। मुरुगन ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी और मानहानी कार्यवाही जारी को जारी रखने का निर्देश दिया गया था। 

पीठ ने मुरुगन के वकील से पूछा कि क्या वे यह बयान देने के लिए तैयार हैं कि उनका इरादा किसी को अपमानित करने का नहीं था। इसके बाद पीठ ने यह भी कहा कि राजनीति में आने पर व्यक्ति को आलोचनाओं और बेवजह की तारीफों का सामना करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई पांच दिसंबर को तय की है।

सर्दियों में बेघरों के लिए सुविधाओं पर जानकारी दें राज्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्यों से कहा कि वह सर्दियों के मौसम बेघर लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई आवास सुविधाओं के बारे में जानकारी दें। जस्टिस बीआर गवाई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें दो हफ्ते के भीतर अपने हलफनामे दाखिल करें, जिनमें बेघरों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से मामले में मदद करने का अनुरोध किया और अधिकारियों से कॉरपोरेट सोसळ रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) से मदद लेने की सलाह दी।  
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डकैत को मारने वाले पुलिसकर्मी को 5 लाख की सम्मान राशि दे यूपी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को डकैत को मारकर लोगों को बचाने वाले 83 वर्षीय सेवानिवृत्त सिपाही को 5 लाख रुपये की सम्मान राशि देने का निर्देश दिया है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने मानवीय रुख अपनाते हुए मानदेय भुगतान का निर्देश दिया।

पीठ सेवानिवृत्त सिपाही राम औतार सिंह यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारियों को उन्हें वीरता पुरस्कार देने की सिफारिश पर कार्रवाई करने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अत्यधिक विलंब के आधार पर याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया था, क्योंकि पुरस्कार देने की सिफारिश 34 साल पहले की गई थी।

यूपी सरकार की ओर से पेश वकील रुचिरा गोयल ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रशस्ति पत्र दिया था और एक लाख रुपये का सम्मान राशि देने को तैयार थी। 
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