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Supreme Court: RPSC पुलिस भर्ती परीक्षा में अब केवल एक छात्र ही बैठेगा, 713 उम्मीदवारों को नहीं मिली इजाजत

Fri, 03 Apr 2026 03:25 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर अपने 2 अप्रैल के आदेश में बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने अब 713 की जगह सिर्फ एक छात्र सूरज मल मीणा को 5-6 अप्रैल की परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। आरपीएससी की अपील पर शीर्ष अदालत ने माना कि पहले आदेश के वक्त कुछ तथ्य छिपाए गए थे। बाकी छात्रों को अब हाईकोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार करना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टी के दिन स्पेशल बेंच बैठाकर अपने ही एक दिन पुराने फैसले को बदल दिया है। शीर्ष अदालत ने इस नए आदेश के बाद अब 713 की जगह सिर्फ एक छात्र ही परीक्षा में बैठ पाएगा।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आरपीएससी की ओर से 5 और 6 अप्रैल को होने वाली इस बड़ी परीक्षा में करीब 1,015 पदों के लिए 7 लाख 70 हजार से ज्यादा उम्मीदवार बैठने वाले हैं। यह परीक्षा पहले धांधली और पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द कर दी गई थी। जब आयोग ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया, तो उन छात्रों को उम्र में कोई छूट नहीं दी गई जो इस बीच ओवरएज यानी अधिक उम्र के हो गए। 

इसी बात को लेकर छात्र पहले हाईकोर्ट गए थे। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने छात्रों को परीक्षा में बैठने की इजाजत दे दी थी, लेकिन बाद में डबल बेंच ने इस पर रोक लगा दी। इसके बाद सूरज मल मीणा नाम के एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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गुरुवार को मिली राहत, शुक्रवार को छिनी
गुरुवार, 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा समेत ऐसे 713 उम्मीदवारों को बड़ी राहत देते हुए आयोग को आदेश दिया था कि वह इन सभी को प्रोविजनल एडमिट कार्ड जारी करे, जिससे ये परीक्षा में शामिल हो सकें। लेकिन शुक्रवार को कहानी पूरी तरह पलट गई। आरपीएससी तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और दलील दी कि गुरुवार को कोर्ट के सामने पूरे तथ्य सही तरीके से नहीं रखे गए और कई जरूरी बातें छिपाई गईं।

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शीर्ष अदालत ने क्या-क्या कहा?
आयोग की दलील सुनने के बाद जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने छुट्टी वाले दिन बैठकर अपने पुराने आदेश में सुधार किया। कोर्ट ने साफ कहा कि अब 713 छात्रों को परीक्षा में बैठने की राहत नहीं दी जा सकती। यह राहत अब सिर्फ मुख्य याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा तक ही सीमित रहेगी।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि बाकी के 712 छात्र राजस्थान हाईकोर्ट जा सकते हैं। अगर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला छात्रों के पक्ष में आता है, तो आयोग को उनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित करनी पड़ सकती है। शीर्ष अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि जो भी छात्र इस अदालती आदेश के तहत परीक्षा दे रहे हैं, उनका रिजल्ट तब तक जारी नहीं होगा जब तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता।

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