जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, यह सेल संबंधित सरकारों की ओर से निर्धारित समय सीमा के भीतर दया याचिकाओं के तेजी से निपटारा करने की जिम्मेदारी उठाएगा। पीठ ने कहा, इसी काम के लिए समर्पित इस सेल का एक प्रभारी अधिकारी होगा जिसे एक पदनाम के तहत नियुक्त किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की दया याचिकाओं के शीघ्र निपटारे के लिए सोमवार को कई निर्देश पारित किए और निर्देश दिया कि ऐसी याचिकाओं से निपटने के लिए राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग अथवा जेल विभाग की ओर से अलग से एक सेल का गठन किया जाए।
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जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, यह सेल संबंधित सरकारों की ओर से निर्धारित समय सीमा के भीतर दया याचिकाओं के तेजी से निपटारा करने की जिम्मेदारी उठाएगा। पीठ ने कहा, इसी काम के लिए समर्पित इस सेल का एक प्रभारी अधिकारी होगा जिसे एक पदनाम के तहत नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी इस समर्पित सेल की ओर से संचार प्राप्त करने और जारी करने का काम करेगा। समर्पित सेल में राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के विधि विभाग और न्यायपालिका या न्याय विभाग के अधिकारी को जोड़ा जाना चाहिए शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखते हुए ये निर्देश जारी किए जिसमें 2007 के पुणे बीपीओ कर्मचारी सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में दो दोषियों की मौत की सजा को अत्यधिक देरी के आधार पर 35 साल की अवधि के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया था।
सभी जेलों में सेल के प्रभारी के बारे में जानकारी उपलब्ध रहेगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सभी जेलों को समर्पित सेल के प्रभारी अधिकारी के पदनाम, उसके पते और ईमेल आईडी के बारे में सूचना दी जाएगी। जैसे ही जेल अधीक्षक/प्रभारी अधिकारी को कैदियों की ओर से दया याचिकाएं प्राप्त होंगी वह तुरंत उसकी प्रतियां समर्पित सेल को भेज देंगे और संबंधित पुलिस स्टेशन या संबंधित जांच एजेंसी के प्रभारी से कैदियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति जैसी जानकारी मांगेंगे।
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पुलिस अधिकारी जरूरी सूचना देने के लिए बाध्य
पीठ ने कहा, जेल अधिकारियों की ओर से भेजे गए अनुरोध की प्राप्ति पर, संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी उक्त जानकारी तुरंत जेल अधिकारियों को देने के लिए बाध्य होंगे।