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Manikrao Kokate: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री को सुप्रीम कोर्ट से राहत, धोखाधड़ी केस में राहत; विधायक बने रहेंगे

Mon, 22 Dec 2025 12:11 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

महाराष्ट्र सरकार में पूर्व मंत्री रहे माणिकराव कोकाटे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली अवकाश पीठ ने धोखाधड़ी और जालसाली के मामले में उन्हें राहत देते हुए कहा कि उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द नहीं की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब भी मांगा है। जानिए क्या है पूरा मामला
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महाराष्ट्र के विधायक से जुड़े मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता) की सजा पर रोक लगा दी है। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की वेकेशन बेंच ने कोकाटे की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भी जारी किया। कोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी के इस वर्षों पुराने मामले में मिली सजा पर रोक लगाते हुए साफ किया कि विधायक के तौर पर उन्हें फिलहाल अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। यानी कोकाटे की विधायिकी नहीं छिनेगी। यह मुकदमा साल 1989-1992 के बीच का है। इसके मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए प्रस्तावित हाउसिंग स्कीम में सालाना आय की सीमा 30,000 रुपये तय की गई थी।

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नासिक की सिन्नर विधानसभा सीट से विधायक हैं
कोकाटे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, राज्य सरकार को नोटिस जारी करें। इस बीच, याचिकाकर्ता की सजा पर इस हद तक रोक रहेगी कि उन्हें विधानसभा सदस्य के तौर पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। हालांकि, इस दौरान वे किसी भी तरह के लाभ के पद पर नहीं रहेंगे। बता दें कि कोकाटे नासिक जिले की सिन्नर विधानसभा सीट से विधायक हैं। इसी साल फरवरी में उन्हें एक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सजा सुनाई गई। गत 16 दिसंबर को नासिक के सत्र न्यायालय ने दो साल की जेल की सजा को बरकरार रखा था। सत्र न्यायालय के आदेश में कहा गया था कि कोकाटे और उनके भाई ने फ्लैट आवंटन में राज्य सरकार को बेईमानी करने के लिए उकसाया।

सजा पर रोक से उच्च न्यायालय की पीठ का इनकार
मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। 19 दिसंबर को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी के इस मामले में कोकाटे की दो साल की जेल की सजा को निलंबित कर जमानत दे दी थी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि अदालत सजा पर रोक नहीं लगा सकती क्योंकि प्रथम दृष्टया इस बात के पर्याप्त सबूत मिले हैं कि NCP नेता कोकाटे इस पूरे मामले में संलिप्त रहे हैं। कोकाटे पर झूठे हलफनामे जमा करके आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बनी सरकारी योजना में फ्लैट हासिल करने का आरोप था।
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जमानत को लेकर उच्च न्यायालय ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें केवल दो साल की सजा सुनाई है। वह सेशंस कोर्ट में ट्रायल के दौरान जमानत पर थे। इसलिए हाईकोर्ट उन्हें जमानत देने के लिए सहमत है। कोकाटे ने हाई कोर्ट की पीठ के समक्ष दायर अपील में अपनी सजा को मनमाना और अवैध बताया था।

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कोकाटे को सीएम फडणवीस की कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा
गौरतलब है कि अदालत की कार्यवाही से इतर इस मामले में जमकर सियासत भी हुई है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्षी खेमे ने इस्तीफे का दबाव बनाया, जिसके बाद बीते 17 दिसंबर को कोकाटे से सभी मंत्रालय छीन लिए गए। 18 दिसंबर को उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। उसी रात नासिक पुलिस की एक टीम उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लेकर बांद्रा पहुंची थी।
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सत्र न्यायालय के जज ने अपने फैसले में किन बातों को रेखांकित किया
नासिक सेशंस कोर्ट के जज ने अपने फैसले में लिखा है कि कोकाटे ने अपनी आय को लेकर झूठे हलफनामे जमा करके बेईमानी की। उन्होंने 'राज्य सरकार को गुमराह किया' ताकि उन्हें फ्लैट आवंटित हो सके। कोर्ट ने अपने फैसले में अंगूर और रबी फसलों के लिए लिए गए बैंक लोन के साथ ही कोपरगांव सहकारी साखर कारखाने (शुगर फैक्ट्री) के रिकॉर्ड का हवाला दिया है। जज ने कहा कि कोकाटे एक समृद्ध किसान हैं, जिनकी आय फ्लैट के लिए तय की गई लिमिट से कहीं अधिक है। इसलिए वे EWS कैटेगरी में होने का दावा नहीं कर सकते।

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