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1400 सालों से चल रही तीन तलाक की परंपरा, आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा अहम फैसला

Tue, 22 Aug 2017 02:46 PM IST
amarujala.com- Presented by: मोहित
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तीन तलाक की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फैसला सुनाएगा। सुबह साढ़े दस बजे चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस पर अपना फैसला सुनाएगी। छह दिन की मैराथन सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गत 18 मई को संविधान पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर के अलावा न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर इस पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सदस्य हैं।

यह पीठ अपने आप में ऐतिहासिक थी क्योंकि सभी जज अलग-अलग संप्रदाय के हैं। संविधान पीठ के समक्ष मुद्दा यह था कि क्या तीन तलाक इस्लाम धर्म के मूल में है या नहीं ? और क्या इसे मौलिक अधिकार के तौर पर लागू किया जा सकता है या नहीं।
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पढ़ें- SC में पर्सनल लॉ बोर्ड का नया दांव, कहा- तीन तलाक के खिलाफ लोगों को करेंगे जागरूक    

सुनवाई के दौरान किसने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट -
अगर खुदा की नजर में तीन तलाक ‘पाप’ है तो उसे कानूनी अमली जामा कैसे करार दिया जा सकता है। हम सुधारक नहीं हैं और कानून व संविधान के तहत हम काम करते हैं।

केंद्र सरकार -
अगर तीन तलाक को खत्म कर दिया जाता है तो शादी और तलाक को लेकर सरकार नया कानून लेकर आएगी।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड -

तीन तलाक 1400 वर्षों से चली आ रही परंपरा है। यह अदालत के अधिकारक्षेत्र में नहीं है कि वह 1400 वर्षों से चली आ रही परंपरा को गैरकानूनी या असंवैधानिक करार दें।   यह ‘फिसलन वाली ढलान’ है, लिहाजा अदालत को इस मामले में एहतिहात बरतने की जरूरत है। बोर्ड ने सुनवाई के अंतिम चरण में कहा था कि वह नहीं चाहता है कि तीन तलाक की प्रथा जारी रहे इसलिए उसने यह तय किया कि  नए निकाहनामे में तीन तलाक न लेने की शर्त होगी। बोर्ड ने कहा कि इस संबंध में देशभर के तमाम काजियों को एडवाजरी भेजने का निर्णय लिया गया है।

ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड -
तीन तलाक इस्लाम धर्म के मूल में नहीं है। तीन तलाक इस्लाम की सभी चीजों का उल्लंघन है। शरीयत, कुरान है न कि धर्मगुरुओं का छंद या अनुवाक्य है। कुरान में तलाक की प्रक्रिया दर्ज है। इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं ने अपनी पसंद के हिसाब से कुरान के तत्वों को तोड़-मरोड़ लिया है।

दिग्गज वकीलों ने रखा पक्ष

इस मामले में कपिल सिब्बल, राम जेठमलानी, सलमान खुर्शीद, आनंद ग्रोवर, इंदिरा जयसिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान सहित कई नामी गिरामी वरिष्ठ वकीलों ने अपना-अपना पक्ष रखा।

पढ़ें- तीन तलाक: SC में 6 दिन की सुनवाई में चुप्पी साधे रहे मुस्लिम जज

 
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याचिका दायर करने वाली महिलाएं

1. शायरा बानो:
उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह के प्रचलन को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की है। शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन कानून,1936 की धारा-दो की संवैधानिकता को चुनौती दी है।

2. आफरीन रहमान:
जयपुर की रहने वाली आफरीन के पति ने स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक का पत्र भेजा था। वैवाहिक पोर्टल के जरिए उनकी शादी हुई थी।

3. इशरत जहां:
पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली इशरत को उसके पति ने दुबई से फोन पर तलाक दे दिया। इतना ही नहीं उसके पति ने चारों बच्चों को उससे छीन लिया। पति ने दूसरी शादी कर ली। इशरत ने याचिका दायर कर तीन तलाक को असंवैधानिक और मुस्लिम महिलाओं के गौरवपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है।

4. आतिया साबरी:
उत्तर प्रदेश की सहारनपुर की रहने वाली आतिया के पति ने वर्ष 2016 में एक कागज पर तीन तलाक लिखकर पत्नी से रिश्ता तोड़ लिया था। वर्ष 2012 में दोनों की शादी हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। आतिया का आरोप है कि दो बेटी होने से उसके पति और ससुर नाराज थे। ससुरालवाले आतिया को घर से निकालना चाहते थे। उसे जहर खिलाकर मारने की भी कोशिश की गई थी।

5 गुलशन परवीन:
उत्तर प्रदेश के रामपुर में रहने वाली गुलशन को पति ने नोएडा से दस रुपये के स्टांप पेपर पर तलाकनामा भेजा था। पति नोएडा में काम करता था। शादी के तीन साल बाद 2016 उसकेपति ने तलाकनामा भेजा था। उसका दो साल का बेटा है।
 
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