सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट मैच फिक्सिंग का देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर वित्तीय प्रभाव पड़ता है। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ 2019 के टी-20 कर्नाटक प्रीमियर लीग घोटाले की गहराई से जांच करने की पेशकश की। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, हम आज ऐसा कुछ भी नहीं कहेंगे जिससे लगे कि हम इस मुद्दे पर पहले से ही निर्णय ले रहे हैं। हम इस मुद्दे की गहराई से जांच कराना चाहते हैं। जज ने जमानत के एक मामले को याद किया जिसमें एक व्यक्ति को सट्टेबाजी में फंसाया गया और वह सब कुछ हार गया। जज ने कहा, वह लगभग भिखारी बन गया और जेल में है। पूरा परिवार अब संकट में है। वे एक अच्छी जिंदगी जी रहे थे और अब पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं।
जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा-तीन साल तक कहां था ये मामला
जस्टिस सूर्यकांत ने इस तथ्य पर गौर किया कि कर्नाटक सरकार की अपील 2022 में दायर की गई थी और अब तीन साल बाद अदालत के सामने आई है। जज ने पूछा, यह मामला कहां गायब हो गया? तीन साल तक इसे सूचीबद्ध नहीं किया गया। हमें बताएं कि मेरी सेवानिवृत्ति का इंतजार कौन कर रहा था। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को चार सप्ताह के बाद भी वाद सूची से न हटाया जाए। साथ ही अदालत ने मामले को सूचीबद्ध न करने के लिए रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण भी मांगा। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा, मैच फिक्सिंग खेल समुदाय के लिए हानिकारक है।
अधिवक्ता शिवम सिंह न्यायमित्र नियुक्त
पीठ ने अधिवक्ता शिवम सिंह को न्यायमित्र नियुक्त किया। सिंह खेल कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इस विषय पर एक पुस्तक भी लिखी है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, आप इस मामले में हमारी सहायता कर सकते हैं। यह सरल रूप से 419 आईपीसी या 420 आईपीसी या इससे भी अधिक है। राज्य का अपना दृष्टिकोण होगा लेकिन हम एक तटस्थ व्यक्ति चाहते हैं जैसे खेलों में हमारे पास अंपायर होते हैं। पीठ ने रजिस्ट्री को इस मामले से जुड़ा संपूर्ण रिकॉर्ड और यूओआई का जवाबी हलफनामा सिंह को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने नहीं मानी थी धोखाधड़ी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 10 जनवरी, 2022 के फैसले में कर्नाटक प्रीमियर लीग टी20 टूर्नामेंट में खिलाड़ियों व टीम प्रबंधन से जुड़े भ्रष्टाचार की जांच में बंगलूरू पुलिस की ओर से उजागर मैच फिक्सिंग मामले को धोखाधड़ी मानने से इन्कार कर दिया था। हाईकोर्ट ने केपीएल में तीन खिलाड़ियों और एक टीम अधिकारी के खिलाफ दायर आरोपपत्र को खारिज कर दिया। पुलिस ने कर्नाटक क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सीएम गौतम, दो खिलाड़ियों अबरार काजी और अमित मावी तथा बेलगावी पैंथर्स टीम के मालिक असफाक अली थारा समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था।