सुप्रीम कोर्ट की ओर से जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की सिफारशों को लागू करने के आदेश के बाद क्रिकेटरों का कद बढना तय हो गया है। वोट की राजनीति के चलते अपने राज्य एसोसिएशन का चुनाव नहीं जीत पाने वाले दिलीप वेंगसरकर, जवागल श्रीनाथ, अनिल कुंबले जैसे क्रिकेटरों के दिन बहुरने वाले हैं।
वहीं सालों से बीसीसीआई में जमे बैठे दिग्गजों को या तो अब एक पद चुनना पड़ेगा या फिर विदा लेनी होगी। बोर्ड अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को अपने पद पर बने रहने केलिए पिछले 15 सालों के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद को छोडना होगा।
यही नहीं लोढ़ा कमेटी की सिफारशें लागू होने पर शरद पवार, आईएस बिंद्रा और निरंजन शाह जैसे दिग्गजों को क्रिकेट से विदा लेनी होगी। वहीं बीसीसीआई पर राज करने वाले पश्चिम क्षेत्र का दबदबा एक राज्य एक वोट की सिफारिश लागू होने से टूट जाएगा। पश्चिम क्षेत्र के चार वोट कम हो जाएंगे।
सिफारशों के लागू होने से अनुराग ठाकुर, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन राजीव शुक्ला, संयुक्त सचिव अमिताभ चौधरी, टे्रजरॉर अनिरुद्ध चौधरी की चौधराहट को तगड़ा झटका लगने वाला है। इन दिग्गजों को अगर बीसीसीआई में बने रहना है तो अपने राज्यों में चली आ रही सत्ता को छोडना होगा।
ये सभी अपने राज्यों में भी पदाधिकारी हैं। इन्हें राज्यों या फिर बीसीसीआई में अपने पदों से इस्तीफा देना होगा। इसी तरह एमसीए अध्यक्ष शरद पवार, सौराष्ट्र के अध्यक्ष निरंजन शाह, पीसीए चेयरमैन आईएस बिंद्रा को 70 साल से अधिक उम्र होने के चलते अपने पदों से इस्तीफा देना होगा।
वहीं बिहार, उत्तराखंड जैसे राज्य जहां क्रिकेट बंद है। अब अपनी टीमें राष्ट्रीय स्तर पर खिला सकेंगे। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा का कहना है कि आदेश में कहा गया है कि जिन राज्य संघों की इकाई में विवाद चल रहा है।
वहां जस्टिस लोढ़ा की कमेटी विवादों को खुद देखकर इकाईयों का गठन कराएगी। यही कारण है कि वह जल्द ही जस्टिस लोढ़ा से मिलकर बिहार में नई क्रिकेट इकाई के गठन की सिफारिश उनसे करेंगे।