सुप्रीम कोर्ट ने 28 साल तक कानूनी लड़ाई के बाद डकैती के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को रिहा कर दिया। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा, अभियोजन पक्ष के मामले पर संदेह है।
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने अनवर उर्फ भुगरा को 1994 के मामले में बरी कर दिया। पीठ ने कहा, हमारे सामने रखी गई सामग्री में अपराध स्थल पर अपीलकर्ता की उपस्थिति और उसके पास से पिस्तौल की बरामदगी अत्यधिक संदिग्ध हो जाती है। उचित संदेह से परे अपीलकर्ता का दोष साबित नहीं होता है और इस कारण सजा को बरकरार नहीं रखा जा सकता। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट व निचली अदालत के आदेश को दरकिनार किया जाता है।