सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बीसीसीआई और बायजू के सह-संस्थापक रिजु रवींद्रन की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही वापस लेने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और रवींद्रन द्वारा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 17 अप्रैल के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया।
बता दें कि बीसीसीआई और रवींद्रन ने पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण की बंगलूरू पीठ के एक आदेश को चुनौती दी थी। जिसने 10 फरवरी को अपने निपटान प्रस्ताव को नए ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के समक्ष रखने का निर्देश दिया था। जिसमें यूएस-आधारित ग्लास ट्रस्ट के सदस्य हैं। जिनका बायजू पर काफी उधार है।
इसपर बायजू के संस्थापकों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने निराशा व्यक्त की। बायजू की ओर से कहा गया कि कार्यवाही वापस लेने से उन लाखों छात्रों और हजारों कर्मचारियों को फायदा होता जो शिक्षण प्रणाली से वंचित हो रहे हैं।
ग्लास ट्रस्ट पर मुकदमा दायर करने की तैयारी में रवींद्रन
बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन और दिव्या गोकुलनाथ साख और कारोबार को हुए नुकसान के लिए ग्लास ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ 2.5 अरब डॉलर से अधिक का मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। बयान के अनुसार, रवींद्रन भारत के साथ-साथ विदेशों में भी ग्लास ट्रस्ट और अन्य पर मुकदमा करने की तैयारी कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान के लिए चर्चित लाजरेफ ले बार्स यूर्ल के वरिष्ठ विधि सलाहकार जे माइकल मैकनट ने एक बयान में कहा, बायजू के संस्थापक उन सभी पक्षों के खिलाफ कार्रवाई करने के सभी अधिकार सुरक्षित रखते हैं जिन्होंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से और उनके कारोबार को नुकसान पहुंचाया है...हमारे विचार में, अल्फा, ग्लास ट्रस्ट और उसके वकील का अदालतों के समक्ष किया गया आचरण निंदनीय और अनुचित रहा है। हम बायजू के संस्थापकों को न्याय दिलाने के लिए सभी कानूनी साधनों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।