जस्टिस कोहली ने कहा, ब्रिटिश राज के दौरान कानूनी पेशा इस देश में सबसे आगे रहा है। उन्होंने लोकतंत्र को जीवंत तरीके से पोषित करने और कानून के शासन को सुनिश्चित करने में कानूनी पेशेवरों के योगदान को भी स्वीकार किया।
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस हिमा कोहली ने शनिवार को कहा कि एक मजबूत बार एक मजबूत न्यायपालिका बनाता है। वह कानूनी पेशेवरों के योगदान को स्वीकार करता है। जस्टिस कोहली बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 'भारतीय वकील दिवस' के अवसर पर बोल रही थीं।
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केजी मार्ग पर स्थित न्यू महाराष्ट्र सदन में बार एसोसिएशन ने बार और कानूनी शिक्षा के प्रतिष्ठित सदस्यों को भी सम्मानित किया। इस मौके पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि कानूनी पेशा कई कारणों से सम्मान हासिल करता है, जिसमें कमजोर वर्गों की आजादी को बनाए रखना भी शामिल है।
जस्टिस कोहली ने कहा, ब्रिटिश राज के दौरान कानूनी पेशा इस देश में सबसे आगे रहा है। उन्होंने लोकतंत्र को जीवंत तरीके से पोषित करने और कानून के शासन को सुनिश्चित करने में कानूनी पेशेवरों के योगदान को भी स्वीकार किया। जस्टिस कोहली ने कहा, ड्राफ्टिंग कमेटी के लगभग सभी सदस्य कानूनी पृष्ठभूमि के थे।
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उन्होंने यह भी बताया कि संसद में वकीलों की संख्या में 36 फीसदी कमी हुई है और अब लोकसभा में केवल चार फीसदी ही वकील हैं। जस्टिस कोहली ने कहा, एक वकील की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक वकील की भूमिका बहुआयामी होती है। कानूनी पेशे को शाही पेश के रूप में प्रचारित किया जाता है, जो कि एक अहम भूमिका निभाता है।
जस्टिस कोहली ने कहा, वकील भाग्यशाली हैं कि वे अन्य क्षेत्रों में भी गहराई तक उतरते हैं। उन्होंने कहा, पहले वकालत का पेशा युवाओं के लिए विकल्प नहीं था, लेकिन अब यह नाटकीय रूप से बदल गया है।