फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपराधिक मामलों की जानकारी अखबारों में न देने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, चुनाव आयोग को नोटिस

Fri, 29 Mar 2019 03:25 PM IST
Priyesh Mishra भाषा, नई दिल्ली
विज्ञापन
supreme court - फोटो : PTI
विज्ञापन
उच्चतम न्यायालय ने चुनाव में सभी प्रत्याशियों के लिये अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी देने संबंधी निर्देशों के कथित उल्लंघन के कारण अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिये दायर याचिका पर शुक्रवार को केन्द्र और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किये।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के दौरान तीन चुनाव उपायुक्तों, विधि सचिव और कैबिनेट सचिव से भी 25 सितंबर, 2018 के फैसले पर अमल नहीं होने के बारे में जवाब मांगा है। 

एक जनहित याचिका पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने पिछले साल सितंबर में सुनाये गये अपने फैसले मे कहा था कि सभी प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से पहले निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि की घोषणा करनी होगी और प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि के बारे में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए ताकि मतदाताओं को उनके बारे में जानकारी मिल सके।
विज्ञापन


निर्वाचन आयोग ने पिछले साल 10 अक्ट्रबर को फार्म 26 में संशोधन के बारे में अधिसूचना जारी की थी और राजनीतिक दलों तथा प्रत्याशियों को आपराधिक मामलों का प्रकाशन करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, उपाध्याय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न आदेश, 1968 और आचार संहिता में संशोधन नहीं किया है। इस वजह से इस अधिसूचना का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि आयोग ने प्रमुख समाचार पत्रों और समाचार चैनलों की सूची प्रकाशित नहीं की और न ही प्रत्याशियों के लिये आपराधिक मामलों के विवरण की घोषणा करने के समय के बारे में स्पष्ट किया। इस वजह से प्रत्याशी कम लोकप्रिय समाचार पत्रों में इन्हें प्रकाशित करा रहे हैं और कम महत्वपूर्ण समय के दौरान चैनलों पर इसका प्रसारण करा रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न आदेश और आदर्श आचार संहिता में आवश्यक संशोधन के बगैर ही दस मार्च को लोकसभा के चुनाव कार्यक्रम की घोषण कर दी जबकि शीर्ष अदालत के 25 सितंबर, 2018 के फैसले का यही सार था और इसीलिए याचिकाकर्ता अवमानना कार्यवाही के लिये याचिका दायर कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें