फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gujarat Riots: तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत पर 25 अगस्त को सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को भेजा नोटिस

Mon, 22 Aug 2022 12:22 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तीस्ता को गुजरात दंगों की साजिश के मामले में राज्य के उच्च पदाधिकारियों को फंसाने के लिए  नकली दस्तावेज बनाकर हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन
तीस्ता सीतलवाड़(फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। तीस्ता की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि सीतलवाड़ के लिए हम अंतरिम राहत चाहते हैं, क्योंकि हाईकोर्ट में 19 सितंबर को सुनवाई रखी गई है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप 25 अगस्त तक इंतजार कीजिए। बता दें कि तीस्ता को गुजरात दंगों की साजिश के मामले में राज्य के उच्च पदाधिकारियों को फंसाने के लिए  नकली दस्तावेज बनाकर हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि सत्र अदालत से झटका लगने के बाद सीतलवाड़ और श्रीकुमार ने इस मामले में नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। उनके वकीलों ने पुष्टि की कि उनके मुवक्किलों ने हाईकोर्ट के समक्ष जमानत याचिका दायर की है और 19 सितंबर को याचिकाओं पर सुनवाई  होगी। 

विज्ञापन


सत्र न्यायालय ने राहत देने से किया था इनकार
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डी. डी. ठक्कर ने राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपियों ने स्पष्ट रूप से गुजरात सरकार को अस्थिर करने और अपने गलत उद्देश्यों के लिए राज्य को बदनाम करने का लक्ष्य रखा था।  
सत्र अदालत ने नोट किया था कि दोनों आरोपी 'गुजरात राज्य को उनके गोपनीय उद्देश्यों के साथ-साथ राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए बदनाम करने में सक्रिय रूप से रुचि रखते थे और उन्होंने एक राजनीतिक गुट के साथ-साथ अन्य देशों से मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसा किया। 
विज्ञापन


प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किए गए थे सीतलवाड़ और श्रीकुमार
सीतलवाड़ और श्रीकुमार को अहमदाबाद शहर की अपराध शाखा ने जून में तब गिरफ्तार किया था जब उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी करना) और 194 (झूठे सबूत गढ़ना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें