सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि आरोपियों को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने से पहले नोटिस दिया जाना चाहिए।
आरोपियों को कठुआ जेल से गुरदासपुर जेल में ट्रांसफर करने के मामले में निष्पक्षता नहीं बरती गई है। आरोपियों को इसमें अपना पक्ष रखने का एक मौका मिलना चाहिए। कुछ आरोपियों के वकील ने कहा कि परिजनों के लिए गुरदासपुर जेल जाना मुश्किल हो जाएगा।
बंद कमरे में होगी सुनवाई
पीठ ने कहा कि पठानकोट जिला एवं सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान सिर्फ जज, आरोपियों के वकील, सरकारी वकील और कोर्ट स्टाफ ही मौजूद रहेंगे। सुनवाई बंद कमरे में होगी।
वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने आरोप लगाया कि अदालत कक्ष में आरोपियों इतने सारे वकीलों की मौजूदगी से निष्पक्ष सुनवाई में दिक्कत आती है। बयान दर्ज करने आने वाले गवाहों को भी इससे खतरा महसूस होता है।
इस मामले में कम से कम 50 वकील आरोपियों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने अपील की कि अदालत को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आरोपियों का बयान दर्ज करना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग की जरूरत नहीं है।