सीजेआई ने दस्तावेजों के निपटारे और रखरखाव के लिए दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रक्रिया में असमानता से असंगत प्रथाओं का जन्म होता है, जिससे अभिलेखीय स्पष्टता और दक्षता प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अदालत के दस्तावेजों के रखरखाव और निपटारे से संबंधित दिशा निर्देश जारी किए। दिशा निर्देशों का उद्देश्य सभी रजिस्ट्री शाखाओं की जवाबदेही तय करना और उनके कामकाज में दक्षता लाना है। शीर्ष अदालत ने प्रशासनिक दस्तावेजों के प्रबंधन में कमी को भी उजागर किया।
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क्यों पड़ी दिशा निर्देश जारी करने की जरूरत
भारत के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने एक संदेश में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री विभाग ने कई शाखाओं में प्रशासनिक अभिलेखों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। सीजेआई ने कहा, 'मामले की कार्यवाही से संबंधित न्यायिक अभिलेख सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 के आदेश LVI में निहित स्पष्ट प्रावधानों द्वारा शासित होते हैं, लेकिन प्रशासनिक अभिलेखों के प्रबंधन के संबंध में कमी बनी हुई है।' सीजेआई ने कहा कि इस असमानता से असंगत प्रथाओं का जन्म होता है, जिससे अभिलेखीय स्पष्टता और दक्षता प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिशा निर्देश जारी किए
'रिकॉर्ड के प्रतिधारण और उन्हें नष्ट करने के लिए दिशानिर्देश 2025' (Guidelines for Retention and Destruction of Records 2025) का उद्देश्य संस्थागत निर्णयों, नीति कार्यान्वयन, अंतर-विभागीय पत्राचार, लेखा परीक्षा और बाहरी हितधारकों के साथ जुड़ाव सहित प्रशासनिक रिकॉर्ड के प्रबंधन में सुसंगतता, जवाबदेही और दक्षता को बढ़ावा देना है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के हस्ताक्षर वाले मूल सबमिशन नोट्स या पेपर बुक को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाए। इसके अलावा, नीति फाइलें, कार्यालय आदेश और परिपत्र फाइलें स्थायी रूप से संरक्षित की जाएं।
रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अवधि मध्यस्थता, मुकदमेबाजी, जांच या लेखा परीक्षा की अंतिम कार्रवाई या निपटान के बाद शुरू होगी। फाइलों/मामलों/रिकॉर्ड को नष्ट करने से पहले सभी संबंधित शाखाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि नष्ट की जा रही फाइलों/मामलों/रिकॉर्ड के विषय-वस्तु के संबंध में कोई अदालती मामला लंबित न हो।
यदि किसी शाखा या शाखा के रिकॉर्ड किसी अन्य शाखा या गोपनीय शाखा से संबंधित रिकॉर्ड से सह-संबंधित हैं, तो अनुभाग में अदालती मामला प्राप्त होते ही अदालती मामले के लंबित होने की सूचना उन्हें भेजी जाए।
इसमें कहा गया है कि संबंधित शाखाओं द्वारा रिकॉर्ड को नष्ट करना और रखना संबंधित रजिस्ट्रार से अनुमोदन के बाद किया जाए।
दिशा-निर्देशों में कहा गया है, 'रिकॉर्ड को नष्ट करने का काम आम तौर पर गर्मी की छुट्टियों/आंशिक अदालती कार्य दिवसों के दौरान किया जाता है। यदि दस्तावेजों/रिकॉर्ड की स्कैन की गई कॉपी को संरक्षित किया जाना है, तो संबंधित रजिस्ट्रार द्वारा रिकॉर्ड को नष्ट करने के समय निर्णय लिया जा सकता है।'
'वित्तीय और बजट से संबंधित दस्तावेजों और फाइलों को 1 अप्रैल से 31 मार्च तक प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अलग से बनाए रखा जाना चाहिए। अन्य सभी रिकॉर्ड, रजिस्टर प्रत्येक कैलेंडर वर्ष, यानी 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक अलग से बनाए रखे जा सकते हैं।'