सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार टि्वटर को नोटिस किया है जिसमें सोशल मीडिया खासतौर पर टि्वटर पर फेक न्यूज और भड़काऊ मैसेज पर लगाम लगाने के लिए तंत्र विकसित करने की गुहार लगाई गई है।
याचिका भाजपा नेता विनीत गोयनका ने दायर की है। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में सरकार, ट्वीटर व अन्य को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए इस याचिका को उनयाचिकाओं के साथ जोड़ दिया है जिसमें सोशल मीडिया को रेगुलेट करने की मांग कीगई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अश्विनी कुमार दुबे ने पीठ सेकहा कि ट्विटर पर भारत विरोधी कंटेंट और नफरत फैलाने वाले विज्ञापनों पर लगामके लिए तंत्र विकसित करने की दरकार है।
याचिका में कहा गया है कि ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने को लेकर कोई तंत्र या कानून न होने के कारण कुछ लोग ट्वीटर व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल भारत के भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। ट्विटर का इस्तेमाल अलगाववादियों द्वारा भीकिया जा रहा है। वे इसके जरिए भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देरहे हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्वीटर जानबूझकर कर मैसेज को बढ़ावा दे रहा है जो इस देश के कानून के खिलाफ है।