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'दूध में मिलावट करने पर क्यों ना किया जाए उम्रकैद का प्रावधान'

Sat, 06 Aug 2016 12:46 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court hearing on Saturday - फोटो : Getty Images
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यह देखते हुए कि दूध का सेवन बच्चे सहित लोगों का एक बड़ा समूह करता है सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मिलावटी दूध के गोरखधंघे में लिप्त लोगों के लिए उम्रकैद की सजा का प्रावधान बनाने के लिए कहा है।
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करीब चार महीने पहले सरकार ने संसद में कहा था कि तीन में से दो भारतीय डिटरजेंट, कास्टिक सोडा, यूरिया, पेंट आदि मिला दूध का सेवन करता है। 

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस आर भानुमति और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने साथ ही सरकार को कई अन्य निर्देश भी दिए हैं।

पिछले चार वर्षों से सरकार को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में बदलाव करने केलिए कहने के बावजूद इसका कोई नतीजा नहीं निकलने केकारण सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया है।

यह देखते हुए कि उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार ने मिलावटी दूध के धंधे में लिप्त पाए जाने के लिए उम्रकैद का प्रावधान बनाया है, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इन पर गौर करते हुए भारतीय दंड संहिता में जरूरी संशोधन करने केलिए कहा है।
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साथ ही अदालत ने सरकार को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 पर पुन: गौर करने केलिए कहा है और ऐसी सजा का प्रावधान बनाने के लिए कहा है जिससे कोई व्यक्ति इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करें।

अदालत का मानना है कि मौजूदा प्रावधान केतहत दोषियों के लिए छह महीने की सजा का प्रावधान है, जो पर्याप्त नहीं है। 
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शीर्ष अदालत के कुछ महत्वपूर्ण निर्देश

दुग्ध उत्पादन की आर्थिकी - फोटो : अमर उजाला
शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि नवजात, बच्चे समेत काफी संख्या में लोग दूध का सेवन करते हैं, ऐसे में उनके स्वास्थ्य को देखते हुए मिलावटी दूध के गोरखधंधे में लिप्त लोगों पर सख्ती बरतनी जरूरी है।

अदालत ने स्वामी अच्युतानंद तीरथ समेत अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिकाओं पर यह फैसला दिया है। याचिका में कहा गया था कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में बड़े पैमाने पर मिलावटी दूध का गोरखधंधा चल रहा है। 

इस मुददे पर अदालत ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए जैसे - 

शीर्ष अदालत के कुछ महत्वपूर्ण निर्देश

 केंद्र और राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए उचित कदम उठाए।

 राज्यों को डेयरी मालिकों, डेयरी ऑपरेटरों और दूध के खुदरा विक्रेताओं तक यह जानकारी पहुंचाने के लिए कहा है कि अगर दूध में कीटनाशक, कास्टिक सोडा सहित अन्य रसायन पाए गए तो उन पर कड़़ी कार्रवाई होगी। 

उन इलाकों की पहचान करने के लिए कहा गया है जहां मिलावटी दूध का धंधा बड़े पैमाने पर होता है।

दूध की जांच के लिए पर्याप्त संख्या में प्रयोगशाला स्थापित किया जाना चाहिए। 

लोगों को इस बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। 

 मिलावट रोकने के लिए राज्यस्तरीय समिति बनाई जाए जिसके प्रमुख मुख्य  सचिव हों।
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