फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट: राष्ट्रपति-राज्यपालों के लिए विधेयकों की मंजूरी की समयसीमा तय करने का मामला,SC कल सुनाएगा फैसला

Wed, 19 Nov 2025 09:18 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाने वाला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 14 सवालों पर शीर्ष अदालत की पांच जजों की संविधान पीठ अपनी राय देगी। 
 
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को राष्ट्रपति के उस संदर्भ पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें पूछा गया था कि क्या कोई सांविधानिक अदालत, राज्य विधानसभाओं से पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए समय-सीमा तय कर सकती है। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनीं और 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मई में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए शीर्ष अदालत से यह स्पष्ट करने के लिए कहा था कि क्या राज्य विधानसभाओं से पारित विधेयकों पर विचार करते समय राष्ट्रपति द्वारा विवेकाधिकार का प्रयोग करने के लिए न्यायिक आदेशों द्वारा समय-सीमा तय की जा सकती है।

राष्ट्रपति ने तमिलनाडु विधानसभा से पारित विधेयकों पर विचार करने में राज्यपाल की शक्तियों पर शीर्ष अदालत के 8 अप्रैल के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट से यह संदर्भ मांगा था। इस फैसले में राष्ट्रपति के लिए भी विधेयकों पर फैसला लेने के लिए समय सीमा तय की गई थी। पांच पृष्ठों के संदर्भ में राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से 14 प्रश्न पूछे और राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों से निपटने में अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर उसकी राय जाननी चाही।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने 11 सिंतबर को सुनवाई के बाद इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में दस दिन तक सुनवाई चली थी, जिसमें संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई ने की थी। उनके साथ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर शामिल थे। इस दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, गोपाल सुब्रमण्यम, अरविंद दातार जैसे कई वरिष्ठ वीकोलों की दलीलें सुनी गईं थी।  

क्या है मामला?
मामला अनुच्छेद 200 से जुड़ा है, जो राज्यपाल को चार विकल्प देता है- विधेयक को मंजूरी देना, खारिज करना, पुनर्विचार के लिए लौटाना या राष्ट्रपति के पास भेजना। कोर्ट अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से भेजे गए 14 सवालों पर विचार करेगा। इनमें यह भी शामिल है कि क्या राज्यपाल या राष्ट्रपति किसी विधेयक की मंजूरी अनिश्चितकाल तक रोक सकते हैं और क्या कोर्ट उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए समयसीमा तय कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें