सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई है कि राफेल पुनर्विचार याचिका और राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका को सुनवाई के लिए एक साथ सूचीबद्ध नहीं किया गया।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि यह हैरत की बात है कि दोनों याचिकाओं को एकसाथ सुनवाई के लिए क्यों सूचीबद्ध नहीं किया। पीठ ने कहा कि यह चौकाने वाली बात है कि हमारे आदेश के बावजूद राहुल गांधी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को सूचीबद्ध नहीं किया गया। यह कहते हुए पीठ ने सुनवाई 10 मई के लिए टाल दी। उस दिन राफेल को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका और अवमानना मामले की सुनवाई एकसाथ होगी।
मालूम हो कि मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। लेखी का कहना है कि राहुल ने 'चौकीदार चोर है' वाला बयान सुप्रीम कोर्ट के मुंह में डाल दिया, लिहाजा उन पर अवमानना की कार्यवाही चलनी चाहिए।
हालांकि राहुल गांधी ने हलफनामा दायर कर अपनी गलती मानते हुए अपने इस बयान पर खेद जताया था। लेकिन राहुल के इस हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं है। जिसके बाद राहुल के वकील ने कहा कि वह अपने इस बयान के लिए माफी मांगते हैं। राहुल को हलफनामे के जरिए अब माफीनामा देना है।
वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा व अरूण शौरी सहित अन्य ने राफेल मसले पर गत वर्ष 14 दिसंबर के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की है। याचिकाकर्ता ने इससे संबंधित कुछ अन्य दस्तावेज पेश करते हुए इस पर परीक्षण करने की गुहार की थी। केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उन दस्तावेजों पर गौर करने का निर्णय लिया है।