सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया। इस फैसले से यह सुनिश्चित होने की संभावना है कि अदालतें वित्त मंत्रालय द्वारा लगभग 9000 अपीलों के बोझ से नहीं दबेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा, एक अप्रैल, 2021 या उसके बाद आयकर अधिनियम के तहत पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना के लिए धारा-148 के तहत जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस अमान्य नहीं हैं।
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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने विभिन्न हाईकोर्ट के आदेशों को संशोधित किया, जिन्होंने एक अप्रैल, 2021 को या उसके बाद असंशोधित धारा-148 के तहत जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा, महज पुराने कानून के तहत जारी होने से नोटिस को अमान्य नहीं कह सकते।
शीर्ष अदालत ने कहा, इन नोटिसों को अब वित्त अधिनियम, 2021 की नई धारा-148 ए के तहत संबंधित जारी माना जाएगा। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया। इस फैसले से यह सुनिश्चित होने की संभावना है कि अदालतें वित्त मंत्रालय द्वारा लगभग 9000 अपीलों के बोझ से नहीं दबेंगी।
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हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर लागू होगा
शीर्ष अदालत ने कहा, यह आदेश हाईकोर्टों में लंबित मामलों पर भी लागू होगा, जिनमें ये नोटिस जारी किए गए थे। हाईकोर्ट ने दो दर्जन से अधिक मामलों में करदाताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए धारा-148 के तहत विभाग द्वारा जारी कई पुनर्मूल्यांकन नोटिसों को रद्द कर दिया था।