गुजरात के राजकोट में एक कोविड अस्पताल में आग लगने के कारण पांच लोगों की मौत की घटना से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट व्यथित दिखाई दिया। शीर्ष अदालत ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की और ऐसी घटनाओं पर रोकथाम लगाने में केंद्र व राज्य सरकारों की विफलता पर कड़ी नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि लगातार ऐसी घटनाएं होने के बावजूद इस समस्या को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि यह झकझोर देने वाली घटना है। यह बेहद गंभीर मामला है और पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और यह सरकारी अस्पतालों के हालात दिखाता है। हम इस मामले में स्वत संज्ञान लेते है। पीठ ने कहा कि दुर्घटना दिखा रही है कि मौके पर ऐसे हालात से निपटने के लिए उचित फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद नहीं थे।
पीठ ने केंद्र सरकार और गुजरात सरकार को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। पीठ ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है। आपके पास यह सब देखने के लिए कितने फायर ऑफिसर मौजूद हैं? आपके पास अग्नि सुरक्षा मानक तक नहीं हैं। ऐसी घटनाएं राज्य से राज्य और अस्पताल से अस्पताल में दोहराई जा रही हैं। राज्यों की तरफ से इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी है। उन्होंने पीठ को आश्वस्त किया कि शुक्रवार को ही बैठक बुलाई जाएगी और तत्काल कदम उठाए जाएंगे। इस पर पीठ ने कहा कि आप चीफ फायर ऑफिसर से संपर्क कर सकते हैं। मेहता ने कहा कि वह इसे लेकर एक कमेटी बनाएंगे। इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि हम कमेटी नहीं उचित कदम चाहते हैं। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।