सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में जम्मू-कश्मीर में सांबा के एक सैन्य अस्पताल में संक्रमित रक्त चढ़ाने से एचआईवी संक्रमित हुए वायुसेना अधिकारी को मुआवजा राशि में 18 लाख रुपये तत्काल देने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 26 सितंबर को दाखिल वायुसेना अधिकारी की याचिका पर अपने फैसले में भारतीय वायुसेना को मुआवजे के रूप में लगभग 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष मंगलवार को उनकी याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में 2023 के शीर्ष अस्पताल के आदेश में दिए गए निर्देशों की अवमानना का आरोप लगाया गया था। पीठ ने 18 लाख रुपये तुरंत भुगतान करने के साथ यह निर्देश भी दिया कि उन्हें यहां बेस अस्पताल में चिकित्सा उपचार प्रदान किया जाएगा। यात्रा व आवास खर्च के लिए प्रत्येक बार 25,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि उन्हें विकलांगता पेंशन का भुगतान करने के लिए उनकी विकलांगता को 100 प्रतिशत माना जाए। पीठ ने इस मामले में न्यायमित्र की दलीलों पर गौर किया कि कुछ मुद्दे थे जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता थी। यह पूर्व सैनिक 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर आतंकवादी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन पराक्रम के दौरान बीमार हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया।