सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक दुष्कर्म मामलों में पतियों को छूट देने वाले कानूनों के खिलाफ याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करेगा।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने सोमवार को कहा कि ये याचिकाएं पहले ही मंगलवार के लिए सूचीबद्ध हैं। मामले में एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने संबंधी अपील की। इससे पहले 18 सितंबर को एक याचिकाकर्ता की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट इस विवादास्पद कानूनी प्रश्न से संबंधित याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर 16 जुलाई को सहमत हो गया था। सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने संकेत दिया था कि इन याचिकाओं पर 18 जुलाई को सुनवाई हो सकती है।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अपवाद खंड के तहत किसी पुरुष के अपनी बालिग पत्नी के साथ यौन संसर्ग या यौन कृत्य दुष्कर्म नहीं है। भारतीय दंड संहिता को निरस्त कर दिया गया है और अब उसकी जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) ने ले ली है। बीएनएस की धारा 63 (दुष्कर्म) के अपवाद-दो में कहा गया है कि किसी पुरुष के अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौनाचार दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है, यदि पत्नी की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी, 2023 को भारतीय दंड संहिता के संबंधित प्रावधान पर आपत्ति जताने वाली कई याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसके तहत बालिग पत्नी से जबरन यौन संबंध बनाने के मामले में पति को अभियोजन से छूट हासिल है। शीर्ष अदालत ने 17 मई को इस मुद्दे पर बीएनएस के प्रावधान को चुनौती देने वाली एक समान याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।