पीठ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामजन्मभूमि न्यास, रामलल्ला विरजमान सहित अन्य पक्षकारों को रामायण, रामचरित्र मानस, गीता सहित अन्य किताबों के संबंधित हिस्सों के अंग्रेजी में अनुवाद का काम दो हफ्ते के भीतर पूरा करने के लिए कहा है।
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सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कहा गया कि रामायण, रामचरित्र मानस, गीता सहित दस ऐसी किताबें हैं, जिन्हें हिन्दू पक्षकारों ने आधार बनाया है। चूंकि ये किताबें हिंदी, पाली, संस्कृत, अवधी आदि भाषाओं में है ऐसे में इन किताबों के संबंधित हिस्सों का अनुवाद जरूरी है।
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनके हिस्से के दस्तावेजों के अनुवाद का काम पूरा हो चुका है और हमने वह दाखिल कर दिया है। उन्होंने बताया कि 504 दस्तावेजों का अनुवाद हो चुका है। 87 गवाहों के बयान केरिकार्ड भी पेश कर दी गई है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी पेश कर दी गई है।
साथ ही पीठ ने इस मामले में श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन और तीस्ता सीतलवाड़ समेत अन्य की दखल याचिका पर फिलहाल विचार करने के इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि पहले वह मुख्य पक्षकारों की दलीलों को सुना जाएगा। जरूरत हुई तो भविष्य में उनका पक्ष भी सुना जाएगा। पीठ ने कहा ‘हम इस मामले को पूरी तरह से एक भूमि विवाद के रूप में देखेंगे। इसमें कई वादी-प्रतिवादी है। पिछली बार भी हमनें कहा था कि हम किसी दखल याचिका को नहीं स्वीकार कर रहे।’
सुनाई के दौरान धवन ने कहा कि इस मामले में कई चीजें हैं। सबसे मूल बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से हमें चोट पहुंची है। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा सुनवाई के दौरान इस तरह की अतिशयोक्ति से दूर रहना चाहिए।