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Supreme Court: 12 मई के फैसले पर पुनर्विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट, न्यायिक अधिकारी बोले- अपमान झेलना पड़ रहा

Tue, 16 May 2023 10:51 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जिन 68 न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति पर रोक लगाई थी, उनमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हसमुखभाई वर्मा भी शामिल हैं। हसमुखभाई वर्मा ने ही मानहानि मामले में राहुल गांधी को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के उन न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिनकी पदोन्नति पर उसने रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई को इस याचिका को सुनवाई के लिए जुलाई में सूचीबद्ध कर दिया है। बता दें कि बीती 12 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में गुजरात के 68 न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति पर रोक लगा दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मंजूरी दे दी है। 

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राहुल गांधी को सजा सुनाने वाले जज भी शामिल
जस्टिस एमआर शाह (रिटायर्ड) की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 मई के फैसले में जिन 68 न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति पर रोक लगाई थी, उनमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हसमुखभाई वर्मा भी शामिल हैं। हसमुखभाई वर्मा ने ही मानहानि मामले में राहुल गांधी को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। अब इन 68 न्यायिक अधिकारियों की तरफ से वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। 

जिस पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए जुलाई में सूचीबद्ध कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते गुजरात हाईकोर्ट ने इन न्यायिक अधिकारियों को उनकी मूल निचली कैडर में भेज दिया है। याचिका में कहा गया है कि इससे न्यायिक अधिकारी अपमानित महसूस कर रहे हैं। 
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प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'हम इसे ग्रीष्म कालीन अवकाश के बाद जुलाई के लिए सूचीबद्ध करते हैं।' सर्वोच्च अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति गुजरात स्टेट ज्यूडिशियल सर्विस रूल 2005 का उल्लंघन है। साल 2011 में इसमें संशोधन किया गया था। इसके तहत मेरिट कम वरिष्ठता और एक सुटेबिलिटी टेस्ट पास करने के बाद ही पदोन्नति हो सकती है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति पर रोक लगा दी थी।

जम्मू कश्मीर की जेलों में बंद कैदियों से संबंधित याचिका हाईकोर्ट को हस्तांतरित
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय में हस्तांतरित कर दी। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि जन सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किए गए 20 से अधिक लोगों को केंद्रशासित प्रदेशों की जेलों से उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे विभिन्न राज्यों की जेलों में स्थानांतरित किया गया है। इस पर प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ ने याचिका को जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय को हस्तांतरित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष 1978 के जम्मू कश्मीर जन सुरक्षा अधिनियम में 2018 में किये गये संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर हैं, इसलिए उचित होगा कि इस याचिका पर भी वहीं विचार हो। केंद्रशासित प्रदेश की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अन्य राज्यों की जेलों में बंद कैदियों से मिलने के लिए परिजनों को सुविधा प्रदान की जा रही है और यह स्वीकार्य प्रणाली है।

डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई 19 तक स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष की नियुक्ति में उपराज्यपाल वीके सक्सेना की निष्क्रियता के आरोप संबंधी दिल्ली सरकार की याचिका की सुनवाई 19 मई तक के लिए मंगलवार को स्थगित कर दी। उपराज्यपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।

'द केरल स्टोरी' पर तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसकी ओर से फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर किसी तरह का अघोषित या सांकेतिक  प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य द्वारा सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने के बावजूद उनके मालिकों ने आम जनता से उत्साहजनक प्रतिक्रिया की कमी के कारण सात मई से फिल्म का प्रदर्शन बंद करने का फैसला किया। राज्य सरकार ने फिल्म के निर्माताओं द्वारा राज्य में वास्तव में प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाते हुए दायर याचिका के जवाब में कहा कि आपत्तियों और विरोध के बीच फिल्म को पांच मई को पूरे तमिलनाडु में 19 मल्टीप्लेक्स में रिलीज किया गया था।

नवाब मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से अनुरोध
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक की याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया। याचिका प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज धन शोधन के एक मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टालने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ लगाई गई है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने उच्च न्यायालय से उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई करने का अनुरोध किया। ईडी का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) की अनुपलब्धता के कारण बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 मई के आदेश के बाद मलिक ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। आदेश में उनकी जमानत याचिका को 6 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
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ईडब्ल्यूएस को मिलता रहेगा आरक्षण, याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाल की संविधान पीठ ने पिछले दिनों उस फैसले को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसमें 103वें संवैधानिक संशोधन(ईडब्ल्यूएस कोटा) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा गया था।
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