महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA)
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें बिल्डरों के साथ कथित तौर पर संबंध रखने वाले महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अधिकारियों को राहत मिली है। महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकारियों पर आरोप है कि रियल स्टेट क्षेत्र के निवेशकों के साथ उनकी सांठ-गांठ से सरकारी खजाने को लगभग 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।