सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान हुई चुनावी धांधली व नकदी जब्त होने के मामले में क्या हुआ है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को इन आपराधिक मुकदमों में हुई कार्रवाई की स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए कहा है।
पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह जानना चाहा था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उसने चुनावी धांधली के कितने मुकदमों पर कार्रवाई की थी। शुक्रवार को आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट को एक चार्ट सौंपी गई। अदालत ने आयोग को हलफनामे के जरिए यह चार्ट पेश करने के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से यह भी बताने के लिए कहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव में अब तक उसके द्वारा की गई शिकायतों पर कितने मुकदमे दर्ज किए गए। पीठ ने सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को इन मुकदमों की भी स्थिति बताने के लिए कहा है।
आयोग द्वारा शुक्रवार को दिए गए चार्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान हुई चुनावी धांधलियों को लेकर राजस्थान में सबसे अधिक (2217) मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर था जहां 542 मुकदमे दर्ज किए गए। दिल्ली में पांच, उत्तराखंड में 33, हरियाणा व पंजाब में दो-दो मुकदमे दर्ज किए गए। जबकि गुजरात में 21 मुकदमे दर्ज गए थे।
सुप्रीम कोर्ट, कर्नाटक सरकार द्वारा हाईकोर्ट के 12 फरवरी, 2015 के आदेश की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। वास्तव में हाईकोर्ट ने प्रतीक परासमपुरिया के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को निरस्त कर दिया था। बेलारी लोकसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग के दस्ते में प्रतीक के पास 20.48 लाख रुपये नकद और कई अन्य चीजें जब्त की थी। कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी है।