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SC: महाराष्ट्र सरकार को एक हफ्ते का समय, गडलिंग से जुड़े आगजनी मामले में दाखिल करने हैं दस्तावेज

Wed, 29 Oct 2025 07:58 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते का समय दिया है, जिसके तहत वकील सुरेंद्र गडलिंग से जुड़े आगजनी मामले में दस्तावेज दाखिल करने हैं।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह का समय दिया है। शीर्ष अदालत ने यह समय वकील सुरेंद्र गडलिंग से जुड़े 2016 के आगजनी मामले में दस्तावेज दाखिल करने के लिए दिया है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने मुकदमे में देरी पर चिंता जताई थी।
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न्यायाधीश जेके माहेश्वरी और न्यायाधीश विजय बिश्नोई की पीठ सुरेंद्र गडलिंग की बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के जनवरी 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें हाईकोर्ट ने 2016 के सूरजगढ़ लौह अयस्क खदान आगजनी मामले में उन्हें जमानत देने से मना कर दिया था। 

एक सप्ताह का समय देने का अनुरोध
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को राज्य से कुछ स्पष्टीकरण मांगे और यह बताने को कहा था कि मुकदमे में देरी का कारण क्या है? पीठ ने राज्य से यह भी बताने को कहा था कि अभियोजन पक्ष कितने समय में मुकदमा पूरा कर लेगा। बुधवार (29 अक्तूबर) को सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ से दस्तावेज पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया। 
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वहीं गडलिंग की ओर से वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने अनुरोध का विरोध किया और कहा कि चार सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है और राज्य अब भी और समय मांग रहा है। राजू ने पीठ से आग्रह किया कि दस्तावेज दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर के रूप में एक सप्ताह का समय दिया जाए। जिसके बाद पीठ ने दस्तावेज दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दे दिया। इसी के साथ पीठ ने गडलिंग को जवाबी हलफनामा दाखिल करने की भी छूट दी और मामले की सुनवाई निर्धारित कर दी।

जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल, माओवादी विद्रोहियों ने 25 दिसंबर 2016 को कथित तौर पर उन 76 वाहनों को आग लगा दी थी, जिनका उपयोग महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में सूरजगढ़ खदानों से लौह अयस्क के परिवहन के लिए किया जा रहा था। वकील सुरेंद्रगडलिंग पर जमीनी स्तर पर सक्रिय माओवादियों को मदद करने का आरोप है। इसी के साथ कई सह-आरोपियों और कुछ फरार आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रचने का भी आरोप है। 

सुरेंद्र गडलिंग एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में भी आरोपी हैं। उन्होंने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित भड़काऊ भाषणों दिए थे। जिसे लेकर पुलिस ने दावा किया था कि इन भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन पुणे जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी थी।
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