इससे पहले बेंच ने जिंदल की याचिका पर एसएफआईओ को नोटिस जारी किया था। बेंच ने कहा था, ‘‘इसमें कितनी रकम शामिल है? 770 करोड़ रुपये, हम समझते हैं कि जमानत नियम है, जेल नहीं, लेकिन कुछ अपवाद भी होने चाहिए। वह 770 करोड़ रुपये की ठगी करके यह नहीं कह सकते कि 'अब तीन साल बाद मुझे जमानत मिल जाएगी'। मुकदमे को पूरा होने में 20 साल लगेंगे।’’
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द की थी जमानत
इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी को निचली अदालत से मिली जमानत इसी साल 30 अप्रैल को रद्द कर दी थी। एसआरएस समूह के खिलाफ एसएफआईओ मामला कर्ज हासिल करने के लिए बैलेंस शीट और वित्तीय दस्तावेजों में गड़बड़ी करने और बैंकों के सामने गलत तथ्य पेश करने के आरोपों के इर्द-गिर्द है।
इस समूह पर आरोप है कि उसने बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने के बाद उस रकम की हेराफेरी की। जिंदल पर आरोप है कि समूह के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने गलत दस्तावेजों से कर्ज लेने समेत कथित गतिविधियों की रूपरेखा तय की थी। एसआरएस समूह सोने, जेवर, संपदा आदि का कारोबार करता है।