अदालत ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नियम 33 के तहत निर्देश जारी कर स्कूल पाठ्यक्रम में ठोस कचरा प्रबंधन प्रथाओं को शामिल करने को कहा है। जागरूकता की कमी दूर करने के लिए 2026 के नियमों का सार, विशेषकर घरों और नागरिकों से संबंधित हिस्सों का, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करने का निर्देश भी दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पालन में 'असमान' स्थिति पर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा क्रियान्वयन खामियों के रहते आज की पीढ़ी आगे के विधायी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
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अदालत ने देशभर में 1 अप्रैल से प्रभावी होने जा रहे ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 को लागू कराने के लिए कार्यपालिका के पास आवश्यक तंत्र सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि नगरपालिका ठोस कचरे की उपेक्षा से अर्थव्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी उतना ही असर पड़ेगा और जब दुनिया प्रौद्योगिकी से संबंधित गतिविधियों में देश की ओर देखती है तो भारत को 2026 के नियमों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए।
अभी नहीं तो कभी नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'अभी नहीं तो कभी नहीं। स्रोत पर पृथक्करण और बुनियादी ढांचे की ठोस तैयारी के बिना उच्च परिणाम की अपेक्षा करना अव्यावहारिक है। कचरा-मुक्त भारत सुनिश्चित करना हर हितधारक का दायित्व है।'
अदालत ने पार्षदों, महापौरों, अध्यक्षों, निगम पार्षदों और वार्ड सदस्यों को स्रोत पर कचरा पृथक्करण शिक्षा के लिए 'लीड फैसिलिटेटर' नामित करते हुए कहा कि अपने-अपने वार्ड में प्रत्येक नागरिक को 2026 के नियमों के क्रियान्वयन से जोड़ना उनका वैधानिक दायित्व है।
स्थानीय निकाय 100 फीसदी अनुपालन की समय-सीमा तय करें : सुप्रीम कोर्ट
जिला कलेक्टरों के माध्यम से ठोस कचरा प्रबंधन अवसंरचना का ऑडिट कराने और चिन्हित समस्याओं तथा उठाए गए कदमों की सूचना समयबद्ध तरीके से मुख्य सचिव को देने का निर्देश दिया गया। अदालत ने कहा कि प्रत्येक स्थानीय निकाय 100 प्रतिशत अनुपालन की समय-सीमा तय कर उसकी जानकारी सार्वजनिक करे। जिला कलेक्टरों को निगमों, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों के अंतर्गत ठोस कचरा प्रबंधन की स्थापना, क्रियान्वयन और संचालन की निगरानी का अधिकार दिया गया है तथा किसी भी गैर-अनुपालन की रिपोर्ट राज्य और केंद्र स्तर पर संबंधित विभागों को भेजी जाएगी।
स्थानीय निकायों को अनुपालन रिपोर्ट के साथ फोटोग्राफिक साक्ष्य ईमेल के जरिए जिला कलेक्टर कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वास्तविक प्रगति का सत्यापन हो सके। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को चार-स्तरीय पृथक्करण व्यवस्था (गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल) के लिए आवश्यक अवसंरचना की पहचान कर उसे शीघ्र चालू कराने को कहा गया है।