मराठा समुदाय को आरक्षण देने के मामले में उद्धव सरकार को राहत मिली है। महाराष्ट्र में शिक्षा और नौकरियों में मराठा समुदाय को आरक्षण पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अंतिम सुनवाई 17 मार्च से शुरू होगी।
इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मराठा समुदाय के लिये 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है। मराठा आरक्षण को रोजगार के मामले में 12 फीसदी तथा शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के मामले में 13 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 27 जून के फैसले में कहा था कि कुल आरक्षणों पर उच्चतम न्यायालय की ओर से लगाई गई 50 फीसदी की सीमा को अपवाद की परिस्थितियों में पार किया जा सकता है। 'यूथ फॉर इक्वेलिटी' के प्रतिनिधि शुक्ला ने अपनी याचिका में कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) कानून, 2018 शीर्ष अदालत द्वारा इंदिरा साहनी मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले में आरक्षण पर लगाई गई 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन है। इस फैसले को मंडल आदेश भी कहा जाता है। इस कानून का मकसद सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण देना था।