सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि सभी हाईकोर्ट इस मामले पर विचार करें क्योंकि इससे ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन’ हो रहा है। देश की कुछ जेल क्षमता से 150 फीसदी तक अधिक कैदी हैं।
शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे मामले को स्वत: संज्ञान रिट याचिका के तौर पर लें। अदालत ने उन्हें एक वकील का एक नोट भी रेफर किया जो इस संबंध में अदालत की न्याय मित्र के तौर पर सहायता कर रहे हैं। जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘न्याय मित्र की ओर से दिए गए नोट से प्रतीत होता है कि जेल अधिकारी जेलों के क्षमता से अधिक भरने होने के मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
इस तरह की कई जेल हैं जो क्षमता से 100 फीसदी और कुछ मामलों में तो यह 150 फीसदी से अधिक भरी हैं।’ पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के महासचिव जरूरी कदम उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति प्रत्येक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजेंगे जो वापस शीर्ष अदालत को रिपोर्ट करेंगे।
शीर्ष अदालत ने जेल में स्टाफ के पद रिक्त होने के मुद्दे को भी देखा। अदालत ने कहा कि जेलों में स्टाफ की भर्ती के लिए प्राधिकारी और राज्य सरकारें बहुत कम रुचि दिखा रही हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को तय की है।