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राजनीतिक दलों को आयकर दायरे से बाहर रखना संवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 11 Jan 2017 08:20 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजनीतिक दलों को आयकर कानून के दायरे से अलग रखने को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक बताया है। शीर्ष अदालत ने कहा है सरकार पर निर्भर है कि वह किसे आयकर से छूट दे और किसे नहीं। चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने राजनीतिक दलों को आयकर कानून के दायरे से अलग रखने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। पीठ ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी विचारधाराओं के प्रचार-प्रसार के लिए पैसे की जरूरत होती है इसलिए वे लोगों से फंड जुटाते हैं। शासन और कानून बनाने में उनकी भागीदारी होती है।
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पीठ ने कहा कि कृषि से आमदनी को आयकर कानून से दूर रखा गया है तो राजनीतिक दलों को भी आयकर कानून से दूर रखा जा सकता है। यह देश पर शासन करने वाले पर निर्भर है कि वह किसे आयकर के दायरे में रखना चाहता है और किसे छूट प्रदान करना चाहता है।

याचिकाकर्ता वकील एम एल शर्मा ने पीठ के समक्ष अपनी दलील रखते हुए जनप्रतिनिधि कानून के उस प्रावधान का विरोध किया, जिसमें राजनीतिक दलों को पहली बार 1989 में जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि संविधान में राजनीतिक दल का जिक्र नहीं है, ऐसे में जनप्रतिनिधि कानून में इसे जोड़ा जाना असंवैधानिक है। चूंकि संविधान राजनीतिक दल को लेकर मौन है लिहाजा उसे आयकर में छूट देने का सवाल नहीं उठता है। लेकिन पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि संविधान में हिन्दू संयुक्त परिवार की बात नहीं है लेकिन कर कानून में जिसका जिक्र है।
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 इस आधार पर मिली थी चुनौती

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि निर्दलीय कानून निर्माताओं (सांसद या विधायक) को भी कर से छूट मिलनी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वह खुद को लिए लड़ाई लड़ता है जबकि राजनीतिक दलों को एक ‘ढांचा’ खड़ा करना होता है जिसके लिए उसे फंड की दरकार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि राजनीतिक दलों को आयकर से छूट का प्रावधान संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है।

जनहित याचिका में आयकर अधिनियम की धारा 13ए को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसके तहत राजनीतिक दलों को छूट दी गई है। साथ ही जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 29 को भी रद्द क रने की मांग की गई थी। इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने वाला बताया गया था, जिसके तहत सभी को बराबर का अधिकार है।

सीबीआई जांच की मांग खारिज

पीठ ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें नोटबंदी के बाद राजनीतिक दलों के पास आए फंड और पार्टियों की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
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