फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट: अनिल अंबानी समूह को राहत, डीएमआरसी की पुनर्विचार याचिका खारिज, जानिए पूरा मामला

Thu, 02 Dec 2021 10:22 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दरअसल, वर्ष 2008 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की इकाई ने 2038 तक सिटी रेल परियोजना चलाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉपोर्रेशन के साथ एक करार किया था। 2012 में अंबानी की कंपनी ने शुल्क और संचालन को लेकर विवादों के कारण राजधानी के एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट का संचालन बंद कर दिया था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें वर्ष 2017 में अनिल अंबानी समूह की स्वामित्व वाली कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) के पक्ष में दिए करीब 4,600 करोड़ रुपए आर्बिट्रेशन अवार्ड को बरकरार रखने के फैसले पर फिर से विचार करने की गुहार लगाई गई थी।

विज्ञापन


जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रविंदर भट की पीठ ने डीएमआरसी की याचिका और संबंधित दस्तावेजों पर गौर करने के बाद कहा, फैसले पर पुनर्विचार करने का मामला नहीं बनता। गत नौ सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017 में डीएएमईपीएल के पक्ष में दिए गए करीब 4600 करोड़ रुपए के आर्बिट्रेशन अवार्ड को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने डीएएमईपीएल के पक्ष में दिए गए आर्बिट्रेशन अवार्ड को दरकिनार किए जाने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया था। डीएएमईपीएल ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से कंपनी को ब्याज समेत 4600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया था।

दरअसल, वर्ष 2008 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की इकाई ने 2038 तक सिटी रेल परियोजना चलाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉपोर्रेशन के साथ एक करार किया था। 2012 में अंबानी की कंपनी ने शुल्क और संचालन को लेकर विवादों के कारण राजधानी के एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट का संचालन बंद कर दिया था। कंपनी ने करार के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए डीएमआरसी के खिलाफ आर्बिट्रेशन का मामला शुरू किया और ट्रर्मिनेशन शुल्क की मांग की थी। तब कंपनी के वकीलों ने अदालत से कहा था कि रिलायंस,  कर्ज दाताओं को भुगतान करने के लिए पैसे का इस्तेमाल करेगी। जिसके बाद शीर्ष अदालत ने बैंकों को कंपनी के खातों को एनपीए के रूप में चिह्नित करने से रोक दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें