सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मादक पेय के उत्पादन, वितरण और खपत को प्रतिबंधित या विनियमित करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार की याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को मना कर दिया।
पीठ ने कहा, यह नीतिगत मामला है और इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिस पर अदालत को फैसला देना चाहिए। हालांकि याचिकाकर्ता उपाध्याय ने कहा, वह सिगरेट के पैकेट पर लेबल की तरह ही मादक पेय पर अनिवार्य चेतावनी लेबल होने की एक सीमित राहत की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, मादक पेय भी सिगरेट की तरह हानिकारक हैं। सिगरेट भी संविधान में नहीं हैं, लेकिन इस पर चेतावनी के लेबल हैं। मैं एक सीमित राहत की मांग कर रहा हूं कि मादक पेय पर भी एक चेतावनी लेबल होना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि इससे लोगों को खासकर युवाओं को मदद मिलेगी। हालांकि पीठ इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और उसने दोहराया कि यह एक नीतिगत मामला है। पीठ ने उपाध्याय को याचिका वापस लेने की सलाह दी।
पटाखों पर प्रतिबंध, 10 अक्तूबर को सुनवाई :
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर दिल्ली सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा सांसद मनोज तिवारी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त कर दी है। सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी। ये याचिका अगले साल एक जनवरी तक पटाखों के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर द्ल्लिी सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने को लेकर है।