कोयंबटूर में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से मुहर लगा दी। शीर्षकोर्ट ने बृहस्पतिवार को इस मामले में फैसले पर पुनर्विचार वाली याचिका को खारिज कर दिया। दोषी ने 10 वर्षीय नाबालिग के साथ उसके भाई की भी हत्या कर दी थी।
जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बहुमत (2:1) के आधार पर दोषी मनोहरन की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मनोहरन के अपराध को समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला बताया। पीठ ने कहा कि फैसले पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नहीं है। गत महीने सुप्रीम कोर्ट ने मनोहरन की फांसी पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि वह पहले उसकी दलील सुनना चाहता है।
गत एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी। मामले के मुताबिक, वर्ष 2010 में मनोहरन और सह आरोपी मोहन कृष्णन ने नाबालिग और उसके छोटे भाई को मंदिर के बाहर से अगवा किया और सुनसान जगह पर ले गए। वहां दोनों ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद आरोपियों ने भाई-बहन को जहर देकर मारने की कोशिश की। जहर से भी जब वे नहीं मरे तो आरोपियों ने दोनों के हाथ बांधकर नहर में फेंक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। सह आरोपी मोहन कृष्णन की बाद में एनकाउंटर में मौत हो गई थी।