सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या करने जैसे गंभीर अपराधों का अंजाम देने वाले लोगों के लिए बेहतर है कि वे अपने परिवार से रिश्तों को भूल जाएं। वर्ष 1996 में लाजपत नगर में हुए बम धमाकों में सजायाफ्ता मोहम्मद नौशाद की अंतरिम जमानत की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। नौशाद की बेटी की शादी 28 फरवरी को है और इसलिए उसने अंतरिम जमानत मांगी थी।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मोहम्मद नौशाद की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने बेटी की शादी में शरीक होने केलिए एक महीने के लिए अंतरिम जमानत देने की गुहार की थी।
पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों को न तो अंतरिम जमानत दी जाएगी और न ही उन्हें पैरोल दी जाएगी। पीठ ने स्पष्ट कहा कि ऐसे अपराधियों को पारिवारिक जरूरतों के लिए जमानत नहीं दी जा सकती। पीठ ने यह भी कहा कि ऐसे अपराधियों परिवार से अपने रिश्तों को भूल जाएं।