आधार से बैंक धोखाधड़ी को रोके जाने के केंद्र सरकार के तर्क को पांच सदस्यीय संविधानिक पीठ ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि आधार हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती है, खासकर बैंक धोखाधड़ी को रोकने में।
क्योंकि बैंक को पता होता है कि उसने किसे लोन दिया है। धोखाधड़ी बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से ही संभव है। पीठ ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं में तो आधार अहम भूमिका निभा सकता है लेकिन बैंक धोखाधड़ी को रोकने में इसकी कोई भूमिका नजर नहीं आती।
साथ ही पीठ ने कहा कि सरकार आधार को समाज में असमानता को दूर करने का जरिया बता रही है लेकिन हकीकत यह है कि असमानता बढ़ रही है।
सिम कार्ड तक आतंकियों की आसान पहुंच को रोकने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने की दलील पर पीठ ने कहा कि आतंकी तो सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल करते हैं, फिर इसकी अनिवार्यता क्यों।