सुप्रीम कोर्ट मुल्लापेरियार बांध से जुड़े मुद्दे से उत्पन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। 31 मार्च को अदालत ने केंद्र सरकार को एक ‘नोट’ दाखिल कर समय सीमा के बारे में और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के कामकाज शुरू करने के बारे में विस्तार से जानकारी देने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्देश दिया है कि केरल के मुल्लापेरियार बांध की पुनर्गठित पर्यवेक्षी समिति एक नियमित प्राधिकरण की स्थापना होने तक सभी वैधानिक कार्यों को अंजाम दे सकती है। अदालत ने कहा कि हमारे आदेश के अनुसार पुनर्गठित पर्यवेक्षी समिति बांध की सुरक्षा से संबंधित सभी मामलों में तब तक जवाबदेह होगी जब तक राष्ट्रीय बांद सुरक्षा प्राधिकरण पूरी तरह काम करने नहीं लग जाता।
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अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह बी कहा कि संबंधित राज्य के मुख्य सचिव यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि पर्यवेक्षी समिति की ओर से दिए गए निर्देश तार्किक अंत तक पहुंचे। साथ ही संबंधित मंत्रालय को नए सिरे से सुरक्षा समीक्षा करने के लिए पर्यवेक्षी समिति को रसद सहायता प्रदान करने का निर्देश भी दिया गया है। यह बांद 1895 में इडुक्की जिले में पेरियार नदी पर बनाया गया था।