सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में दूरसंचार कंपनियों को आदेश दिया कि वे उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले विशेष टैरिफ और ऑफर्स का विवरण दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को दें। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने ट्राई के अंतरिम आवेदन पर यह आदेश दिया।
पीठ ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा पारदर्शिता और बगैर भेदभाव के नियामक के सिद्धांतों का पालन के लिए कहना न तो गैर कानूनी है और न ही अनुचित है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आलोक में, ट्राई सुनिश्चित करना चाहता है कि पारदर्शिता और भेदभाव रहित जैसे नियामक सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जाए, इसे पहली नजर में न तो गैरकानूनी और न ही पूरी तरह से अनुचित कहा जा सकता है।
पीठ ने कहा, इसलिए अंतरिम आवेदन स्वीकार किया जाता है और प्रतिवादियों (भारती एयरटेल और अन्य) को निर्देश दिया जाता है कि वे आवेदक ट्राई द्वारा विभिन्न ऑफर्स के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएं। अदालत ने कहा कि ट्राई का कर्तव्य और दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी सूचनाओं को गोपनीय रखा जाए और इन्हें प्रतिस्पर्धियों या किसी अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध नहीं कराया जाए।
ट्राई ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए ऐसे सभी प्लान के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था। एयरटेल और वोडाफोन ने इसका विरोध करते हुये टीडीसैट से इसमें राहत देने का अनुरोध किया था। इनका कहना था कि ये टैरिफ प्लान नहीं हैं इसलिए इनकी जानकारी देने की जरूरत नहीं है। रिलायंस जिओ इंफोकॉम और सरकारी मोबाइल सेवा प्रदाताओं ने आदेश का पालन किया था।