सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को दिव्यांग कैदियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया मजबूत, स्वतंत्र और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह तंत्र शिकायतों का शीघ्र पंजीकरण, प्रभावी निगरानी और समय पर समाधान सुनिश्चित करेगा ताकि कैदियों को व्यवस्थागत उपेक्षा, दुर्व्यवहार और भेदभावपूर्ण प्रथाओं से बचाया जा सके।
4 महीने में देनी होगी रिपोर्ट
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 4 महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को करेगा।
शिक्षा से वंचित नहीं होंगे दिव्यांग कैदी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी उचित सुविधाएं बनाई जाएं जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि विकलांग कैदियों को जेल के भीतर समावेशी शिक्षा तक सार्थक पहुंच मिले। पीठ ने कहा, किसी भी कैदी को सिर्फ दिव्यांगता की वजह से शैक्षणिक कार्यक्रम में आगे बढ़ने के मौके से दूर नहीं किया जाएगा। उनके अच्छे से हिस्सा लेने के लिए सही बदलाव किए जाएंगे। पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर पारित किया, जिसमें विचाराधीन या दोषी के रूप में जेलों में बंद दिव्यांग व्यक्तियों को उचित कानूनी ढांचा और सुविधाएं प्रदान करने के लिए विस्तृत निर्देश देने की मांग की गई थी।
दिव्यांग-अनुकूल जेल सुविधाएं अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिव्यांग-अनुकूल जेल सुविधाओं को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। अदालत ने याद दिलाया कि पहले दिए गए आदेशों के अनुसार हर जेल परिसर में व्हीलचेयर-अनुकूल मार्ग, रैंप, सुलभ शौचालय, सेंसर-सेफ वातावरण और सुरक्षित व सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोर्ट ने राज्यों को एक विस्तृत कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश भी दिया है, जिसमें यह बताया जाए कि दिव्यांग कैदियों के लिए आवश्यक सहायता उपकरण, सहायक तकनीक, प्रशिक्षित स्टाफ और अन्य सुविधाएं कैसे और किस व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुलाकात के लिए अतिरिक्त छूट, परिवार से जुड़े रहने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बेंचमार्क दिव्यांगता वाले कैदियों को अधिक मुलाकातें दिए जाने पर विचार किया जाए, ताकि उनकी भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों की अनदेखी न हो। इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश संबंधित राज्य तैयार करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधिकारियों, स्टाफ और लीगल-एड कर्मियों को दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 89 की जानकारी देने पर जोर दिया, ताकि किसी भी उल्लंघन पर उत्तरदायित्व तय हो सके।