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Supreme Court: राज्य बार काउंसिल चुनाव की याचिकाएं सूचीबद्ध न हों; अदालत का निर्देश- शिकायत समिति को भेजें

Wed, 18 Feb 2026 07:23 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों से संबंधित नई याचिकाओं को सूचीबद्ध न करने का निर्देश दिया और प्रभावित पक्षों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित चुनाव समिति के पास जाने को कहा।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य बार काउंसिल चुनावों से संबंधित किसी भी नई याचिका को सूचीबद्ध न करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि प्रभावित पक्ष अपने शिकायतों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षी समिति के पास जाएं।

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समिति का गठन और उद्देश्य
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया को समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। समिति में न्यायमूर्ति रवि शंकर झा (पूर्व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों की समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया था कि सभी चुनावों की निगरानी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा की जाए, जिसकी अंतिम समयसीमा 31 जनवरी, 2026 निर्धारित की गई थी।

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याचिकाओं का निपटान
हालांकि, हाल के महीनों में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें नाम हटाने, चुनाव में अनियमितताएं और समयसीमा बढ़ाने जैसे मुद्दे उठाए गए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली भी शामिल थे, जिन्होंने निर्देश दिया कि अब राज्य बार काउंसिल से संबंधित कोई नई याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बजाय, शिकायतों का निपटारा और सुधारात्मक उपाय जस्टिस सुधांशु धूलिया समिति के माध्यम से किया जाएगा।
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महिला और विशेष वकीलों की भागीदारी
दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को अपरिवर्तनीय बताया और किसी भी कमी को सह-नियुक्ति के माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने विशेष जरूरतों वाले वकीलों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन किया। इसके तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ऐसे उम्मीदवारों के लिए नामांकन शुल्क में छूट देने का निर्णय लिया।

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