सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह उत्तर प्रदेश के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी द्वारा अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका पर चार महीने के भीतर फैसला करे। जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने यह देखते हुए भानवी सिंह की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 12 फरवरी को हाईकोर्ट में होनी है।
उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ उनकी पत्नी भानवी सिंह की शिकायत पर दिल्ली में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़े घरेलू हिंसा व तलाक के मामले अदालतों में लंबित हैं।
पति और ससुराल पक्ष द्वारा लंबे समय तक शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना
निजता में हस्तक्षेप और सास द्वारा वैवाहिक जीवन में दखल
लगातार मारपीट से शारीरिक क्षति
गर्भावस्था व प्रसव के दौरान देखभाल में लापरवाही
बेटियों के जन्म से खुश नहीं थे राजा भैया...
3 जुलाई 1998 को भानवी सिंह ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया। भानवी का आरोप है कि बेटियों को उनके पति ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपना अंसंतोष जाहिर कर दिया। आरोप है कि इसके बाद उनके साथ और अधिक दुर्व्यवहार होने लगा। भानवी का आरोप है कि बेटियों के जन्म देने से पहले भी उनकी देखभाल नहीं की गई। इसकी वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उनको जबरन लखनऊ से बेंती कोठी भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत और बिगड़ गई और उनको अस्पताल में भर्ती होने लगा। उनके पति बड़ी मुश्किल से मिलने आए। उनके साथ ज्यादातर समय उनकी छोटी बहन साध्वी मौजूद रहती थीं।