सर्वोच्च न्यायालय ने देश में सूखे की हालत को लेकर दायर याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इससे निपटने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट सूखे पर तीन हिस्सों में फैसला सुनाएगा, जिसका आज पहला फैसला आया। देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र के साथ-साथ राज्यों को भी सूखे की स्थिति को गंभीरता से नहीं लेने पर कई बार फटकार लगाई थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यों को सूखाग्रस्त घोषित करते समय उसमें आत्महत्या और किसानों के पलायन के मुद्दों को भी शामिल किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के कृषि सचिव को कहा कि वह बिहार, हरियाणा, गुजरात के मुख्य सचिव के साथ एक सप्ताह के भीतर बैठक करके तय करें कि वहां सूखे के हालात हैं या नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सूखे को लेकर तैयार की गई ड्रॉफ्ट को भी रिवाइज किया जाएगा और इसमें यह समयसीमा दी जाएगी कि राज्य कब सूखा घोषित करें। सर्वोच्च अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि सरकार सूखे से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें।
इससे पहले 27 अप्रैल को सूखे से जुड़े एक अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने आईपीएल मैचों को लेकर मुंबई और एमसीए की याचिका खारिज करते हुए महाराष्ट्र में 1 मई के बाद आईपीएल पर रोक बरकरार रखी थी। मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर ने कहा था कि सूखे के चलते लोगों को पानी नहीं मिल रहा है और ऐसे में मैचों को बाहर ले जाना बेहतर रहेगा।
20 अप्रैल की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने सूखे की स्थिति पर शपथ पत्र के बजाय टिप्पणी प्रस्तुत करने को लेकर गुजरात को आड़े हाथों लिया था। कोर्ट ने कहा था कि आपने हलफनामा दाखिल क्यों नहीं किया? चीजों को इतना हल्के में न लें। सिर्फ इसलिए कि आप गुजरात हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी करेंगे।
गौरतलब है कि पिछले साल की तुलना में इस साल हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, ओड़िशा, राजस्थान, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में प्रमुख जलाशयों में जल का स्तर बहुत कम हो गया है और वहां सूखे की गंभीर स्थिति है।