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SC: '10 से ज्यादा आतंकवाद-रोधी मामले लंबित होने पर विशेष NIA कोर्ट बनाएं', कोर्ट का राज्यों को निर्देश

Tue, 10 Feb 2026 08:05 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने 17 राज्यों को नोटिस जारी कर वहां स्पेशल एनआईए कोर्ट बनाने का निर्देश दिया है, जहां 10 से ज्यादा आतंकी मामले पेंडिंग हैं। केंद्र सरकार इन कोर्ट के लिए फंड देगी। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी से अन्याय होता है, इसलिए राज्यों को तीन हफ्ते में जवाब देना होगा।

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करूर भगदड़ हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम कदम उठाते हुए दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र समेत 17 राज्यों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन राज्यों से यह पक्का करने को कहा है कि वहां स्पेशल एनआईए कोर्ट बनाए जाएं, जहां एंटी-टेरर कानूनों के तहत 10 या उससे ज्यादा केस ट्रायल के लिए पेंडिंग हैं।
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया भी शामिल थे। केंद्र की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने इन स्पेशल कोर्ट के लिए आर्थिक मदद देने के नियम तय कर दिए हैं।

केंद्र सरकार देगी फंड
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार हर एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट के लिए दो तरह से मदद देगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य स्थाई खर्चों के लिए एक करोड़ रुपये का एक बार का ग्रांट दिया जाएगा। इसके अलावा, हर साल होने वाले खर्चों (रिकरिंग) के लिए भी एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस पैसे का इस्तेमाल कोर्ट की मरम्मत, कंप्यूटर जैसे IT सामान, गाड़ियां और स्टाफ की सैलरी के लिए होगा।
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राज्यों को तीन हफ्ते का समय
दलीलों पर ध्यान देते हुए, बेंच ने 17 राज्यों के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि वे इस रिपोर्ट पर तीन हफ्ते के अंदर अपना जवाब दें। कोर्ट का कहना है कि अगर लंबा ट्रायल चलने के बाद कोई आरोपी निर्दोष साबित होता है, तो यह उसके साथ अन्याय है। इसलिए स्पेशल कोर्ट बनाकर जल्द फैसला होना जरूरी है।

ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'क्या इसके पीछे कोई देशव्यापी नेटवर्क?' लापता बच्चों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- इसका पता लगाए

दिल्ली में बनेंगे 16 स्पेशल कोर्ट
लॉ ऑफिसर ने यह भी कहा कि नेशनल कैपिटल के राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स में अलग-अलग स्पेशल कानूनों के तहत 16 स्पेशल कोर्ट बनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनआईए एक्ट, यूएपीए और एनडीपीएस जैसे खास कानूनों के लिए बनी ये कोर्ट अप्रैल 2026 तक काम करने के लिए तैयार हो जाएंगी। इसमें कहा गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने कन्फर्म किया है कि दिल्ली हायर ज्यूडिशियल सर्विस के ज्यूडिशियल ऑफिसर इन कोर्ट की अध्यक्षता करने के लिए उपलब्ध हैं।

अन्य राज्यों का हाल
बिहार के पटना में आठ जनवरी के नोटिफिकेशन के तहत एक कोर्ट को एक्सक्लूसिव एनआईए कोर्ट घोषित किया गया है। जम्मू और रांची में पहले ही एक्सक्लूसिव एनआईए कोर्ट बनाए जा चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र के बॉम्बे सेशंस कोर्ट में मार्च 2025 से एक एक्सक्लूसिव एनआईए कोर्ट काम कर रहा है।
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पेंडिंग केसों के आंकड़े
इससे पता चलता है कि दिल्ली में सबसे ज्यादा 59 पेंडिंग केस हैं, इसके बाद जम्मू और कश्मीर (38), असम (33), गुजरात (33), और केरल (33) हैं। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि वह तीन हफ्ते बाद दूसरी स्पेशल कोर्ट बनाने से जुड़ी बातों पर सुनवाई करेगी। 16 दिसंबर, 2025 को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तेजी से ट्रायल पक्का करने के लिए, उसने हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक डेडिकेटेड एनआईए कोर्ट और उन जगहों पर एक से ज्यादा कोर्ट बनाने का फैसला किया है, जहां एंटी-टेरर कानूनों के तहत 10 से ज्यादा केस हैं।

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